राष्ट्रवाणी: राज्य ब्यूरो, , रायपुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। कांग्रेस इसे आधा-अधूरा न्याय बताते हुए आगे कानूनी लड़ाई लड़ने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।
इसके लिए शनिवार को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दी जाएगी, ताकि उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके।
कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की जाएगी। इसके अतिरिक्त, इस मामले में अन्य आवश्यक विधिक और राजनीतिक कदम भी उठाए जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम और एनआइए की जांच में खामियों को उजागर करते हुए, जांच में शामिल षड्यंत्रों और बड़े माओवादियों को बचाने के संदर्भ में दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की जाएगी।
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू, डा. शिवकुमार डहरिया, अमितेष शुक्ल, वर्चुअल रूप से पूर्व मंत्री टी. एस. सिंहदेव, उमेश पटेल, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र शर्मा व अन्य उपस्थित रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एनआईए की जांच और फैसले में आधा न्याय ही हुआ है। झीरम घाटी कांड एक ऐसा कांड था जिसने कांग्रेस के नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी को समाप्त कर दिया। यह घटना स्वतंत्र भारत में हुई एक दुर्दांत और हृदय विदारक घटना है, जो भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में डाॅ. रमन सिंह के राज में घटित हुई थी।
इसके गुनाहगारों को सजा मिलनी चाहिए। बैज ने कहा कि एनआइए की जांच में गुनाहगार बाहर हैं और भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता केवल राजनीति कर रहे हैं।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे झीरम का सच अपनी जेब में होने का दावा करते रहे, लेकिन जांच के दौरान कुछ नहीं निकला। भूपेश बघेल ने कहा कि हमने अपने बड़े नेताओं को खोया है और अरुण साव को इस दर्द का एहसास नहीं है।
