राष्ट्रवाणी: Damp Cloth Trick For Kneaded Wheat Dough: आटा भारतीय घरों की रसोई का अहम हिस्सा है. दाल, सब्जी या किसी भी दूसरी डिश के साथ गर्मागर्म रोटी खाना लगभग हर घर में पसंद किया जाता है. नरम और गोल रोटी बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे को पानी की मदद से अच्छी तरह गूंथा जाता है. कई लोग इसमें थोड़ा तेल भी डालते हैं, जिससे आटा नरम रहता है और रोटियां भी मुलायम बनती हैं. आमतौर पर गूंथे हुए आटे को फ्रिज में रख दिया जाता है, लेकिन हर किसी के घर में हमेशा फ्रिज उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में पुराने समय में लोग आटे को कुछ समय के लिए सुरक्षित रखने के लिए कुछ घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करते थे. गांवों में पहले हर घर में फ्रिज नहीं हुआ करता था. ऐसे समय में गूंथे हुए आटे को जरूरत के हिसाब से ही तैयार किया जाता था और उसे ठंडी, साफ जगह पर रखा जाता था. अगर आपको भी कुछ घंटों के लिए गूंथा हुआ आटा रखना है और फ्रिज का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. आटा गूंथने के बाद उसे खुला छोड़ना ठीक नहीं है. खुले में रखने से आटे की ऊपरी सतह जल्दी सूख सकती है और उस पर धूल-मिट्टी भी जम सकती है. इसलिए आटे को किसी साफ बर्तन में रखें और ऊपर से साफ गीले कपड़े से ढक दें. कपड़ा इतना गीला न हो कि उसका पानी आटे में जमा होने लगे. इसका मकसद सिर्फ आटे की सतह को सूखने से बचाना है. पुराने समय में घरों में आटे को ढककर रखने का यह तरीका काफी आम था. खासकर तब, जब आटा कुछ ही घंटों में इस्तेमाल किया जाना हो. अगर फ्रिज नहीं है, तो गूंथे हुए आटे को रसोई की ऐसी जगह पर रखें जहां सीधी धूप न आती हो और गर्मी कम हो. गैस चूल्हे, ओवन या किसी गर्म उपकरण के पास आटा रखने से बचें. गर्म जगह पर आटा जल्दी गर्म हो सकता है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. गांवों में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल चीजों को अपेक्षाकृत ठंडी रखने के लिए किया जाता था. अगर आपके पास साफ और उपयुक्त मिट्टी का बर्तन है, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन बर्तन पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए. गूंथे हुए आटे की सतह पर बहुत हल्की परत में तेल लगाया जा सकता है. इससे आटे की ऊपरी सतह जल्दी सूखने से बच सकती है. तेल लगाने के बाद आटे को अच्छी तरह ढककर रखें. ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं है. यह तरीका खासतौर पर तब उपयोगी हो सकता है, जब आटा कुछ समय बाद रोटियां बनाने के लिए इस्तेमाल करना हो. बिना फ्रिज गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक रखने के बजाय जरूरत के हिसाब से आटा तैयार करना बेहतर है. पुराने समय में भी कई घरों में दिनभर की जरूरत के अनुसार ही आटा गूंथा जाता था. इससे आटा लंबे समय तक रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी और ताजी रोटियां बनाई जा सकती थीं. अगर आपको पता है कि कुछ घंटों बाद ही रोटी बनानी है, तो उतनी ही मात्रा में आटा गूंथें. इससे बचे हुए आटे को सुरक्षित रखने की चिंता भी कम होगी. यह बात सबसे ज्यादा जरूरी है कि बिना फ्रिज गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना सही नहीं है, खासकर गर्मी या बहुत उमस वाले मौसम में. तापमान ज्यादा होने पर आटा जल्दी खराब हो सकता है. अगर आटे से अजीब गंध आने लगे, उसका रंग या बनावट बदल जाए या वह सामान्य से ज्यादा चिपचिपा लगे, तो उसे इस्तेमाल न करें. इसलिए बिना फ्रिज वाला घरेलू तरीका केवल थोड़े समय के लिए ही अपनाना बेहतर है. अगर आटे को लंबे समय तक बचाकर रखना है, तो फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. गांवों में अपनाए जाने वाले पुराने तरीकों की खासियत यही थी कि खाना जरूरत के हिसाब से तैयार किया जाता था और उसे साफ-सुथरी, ठंडी जगह पर ढककर रखा जाता था. अगर आपके घर में फ्रिज नहीं है, तो गूंथे हुए आटे को साफ बर्तन में रखकर ढकें, धूप और गर्मी से बचाएं और संभव हो तो कुछ ही घंटों के अंदर इस्तेमाल कर लें. इससे आटे को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रखने से बचा जा सकता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version