बेंगलुरु. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से आग्रह किया कि वह कोप्पल में एक हिंदू कार्यकर्ता की हत्या की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने के लिए राज्य सरकार को राजी करें. भाजपा ने इस मामले में जिहादी चरमपंथी समूहों पर ‘गहरी साजिश’ रचने का आरोप लगाया.
राजभवन में राज्यपाल को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में भाजपा विधायकों ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वाल्मीकि समुदाय के नेता गविसिद्दप्पा नायक की तीन अगस्त को कोप्पल शहर में सैयद नदीमुल्लाह कादरी मस्जिद के सामने बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हत्या में ”पीएफआई और एसडीपीआई की छाप” नजर आती है. उसने कांग्रेस सरकार पर ‘खतरनाक तत्वों’ के प्रति ‘नरम रुख’ दिखाने का आरोप लगाया.
ज्ञापन में कहा गया है, ”तीन अगस्त 2025 को गविसिद्दप्पा नायक नामक व्यक्ति की नृशंस और निर्मम हत्या से कोप्पल की शांति और सौहार्द भंग हो गया. यह हत्या कोप्पल शहर के मध्य में स्थित मस्जिद के ठीक सामने शाम 7.30 से आठ बजे के बीच हुई.” भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी सादिक कोलकर ने हत्या से एक दिन पहले कोप्पल में खुलेआम तलवारों और छुरों के साथ परेड की थी और सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए थे.
उन्होंने कहा, ”पुलिस ने उसी दिन एहतियातन गिरफ्तारियां की होतीं तो शायद हत्या को रोका जा सकता था. हम पुलिस पर कर्तव्य में लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रुख का आरोप लगाते हैं.” ज्ञापन के अनुसार नायक को पहले बातचीत के लिए एक राजमार्ग पर बुलाया गया, लेकिन बाद में कोप्पल कस्बे में उनकी हत्या कर दी गई.
इसमें कहा गया है, ”मंशा बिल्कुल स्पष्ट है – हिंदुओं में आतंक पैदा करना और समाज को यह साबित करना कि वे किसी को भी बिना स्वयं कोई सजा पाए मार सकते हैं और आराम से बच सकते हैं.” भाजपा ने आरोप लगाया कि हमले की प्रकृति – सिर काटना और गला काटना – तटीय कर्नाटक में हिंदू कार्यकर्ताओं की पहले हुई हत्याओं से मिलती जुलती है. पार्टी ने कहा, ”हत्या के पीछे की मंशा, तरीके और मकसद को देखते हुए, निर्विवाद रूप से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इस कोप्पल हत्याकांड में एसडीपीआई और पीएफआई की पूरी छाप है.” ज्ञापन में कहा गया, ”तटीय जिलों में सक्रिय जिहादी ताकतें कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के कोप्पल में प्रवेश कर चुकी हैं. इसे शुरू में ही नष्ट कर देना चाहिए, नहीं तो यह पूरे उत्तर कर्नाटक क्षेत्र में फैल जाएंगी.” ज्ञापन में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और गृह मंत्री जी परमेश्वर पर ऐसे तत्वों से निपटने में नरम रुख अपनाने का भी आरोप लगाया गया.
इसमें कहा गया है, ”मुख्यमंत्री श्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कायरतापूर्ण रवैया और गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर का ढुलमुल रवैया इस खूनी अध्याय का मुख्य कारण रहा है. कोप्पल इसका नवीनतम उदाहरण है.” भाजपा विधायकों ने दलील दी कि एनआईए जांच ”कर्नाटक में अन्यत्र सक्रिय जिहादी ताकतों के नापाक मंसूबों” को उजागर करने के लिए आवश्यक है.
विधायकों ने दावा किया कि हत्यारों को ”विदेश से वित्तपोषित करने वाले ‘स्लीपर सेल’ द्वारा प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया गया था”. उन्होंने कहा कि केवल एक केंद्रीय जांच ही ”निष्पक्ष, पारदर्शी और संपूर्ण जांच” सुनिश्चित कर सकती है.
राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप की उम्मीद जताते हुए भाजपा ने कहा, ”हमें पूरी उम्मीद है कि महामहिम हमारे अनुरोध पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे तथा राज्य सरकार पर गविसिद्दप्पा नायक हत्या मामले को तुरंत राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने के लिए दबाव डालेंगे.” नायक की हत्या से कोप्पल और उत्तरी कर्नाटक के अन्य भागों में व्यापक आक्रोश फैल गया तथा विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर चरमपंथी हिंसा को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था.
पुलिस ने मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और मुख्य आरोपी कोलकर की तलाश तेज कर दी है. वहीं केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का दबाव बढ. रहा है. वहीं, बुधवार को इस मुद्दे की गूंज राज्य विधानसभा में भी सुनाई दी. शून्यकाल के दौरान मामला उठाते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के नायक की दूसरे समुदाय की महिला से प्रेम करने के कारण जघन्य हत्या कर दी गई.
भाजपा नेता ने कहा कि आरोपियों ने हत्या से एक दिन पहले ही चाकू का इस्तेमाल कर रील बनायी थी और इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा सावधानी न बरतने के कारण यह हत्या हुई. विजयेंद्र ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के बाद ही पुलिस ने कार्रवाई की और गिरफ्तारियां कीं. उन्होंने नायक के परिवार के गरीब होने का हवाला देते हुए उनके लिए मुआवजे की मांग की, जैसा कि मंगलुरु में मारे गए मोहम्मद फाजिल के परिवार को 25 लाख रुपये दिए गए थे.
उन्होंने कहा, ”चूंकि गविसिद्दप्पा नायक का परिवार गरीब है, इसलिए कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा, दो एकड़ जमीन और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए.” भाजपा नेता ने कहा कि मामला एनआईए को सौंप दिया जाना चाहिए, क्योंकि पुलिस विभाग पर भरोसा नहीं है.
बाद में विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने जब कहा कि सरकार बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर जवाब देगी, क्योंकि गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे, तो भाजपा सदस्यों ने गंभीर मामला होने के कारण आज ही जवाब देने की मांग की. इस पर भाजपा और सत्तारूढ. कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई.
