राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर: कटहल की महक हाथियों को मरवाही के कन्या छात्रावास तक खींच लाई। हाथियों ने छात्रावास की बाउंड्रीवाल को पांच जगह से तोड़कर परिसर में प्रवेश किया और गार्ड रूम के साथ खिड़की व दरवाजों को भी नुकसान पहुंचाया। हाथियों की धमक से वन विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में छात्रावास में रहने वाली 58 छात्राओं सुरक्षा को मद्देनजर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। राहत की बात यह है कि सभी छात्राएं सुरक्षित हैं। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और मुनादी कराकर ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने तथा सतर्क रहने की अपील कर रही है। यह हाथियों का वही दल है, जो पिछले दिनों अनूपपुर की ओर चला गया था। अब यह दल लौट आया है। इसके बाद से लगातार फसलों व मकानों को नुकसान पहुंचा रहे थे। इसी बीच दल के दो हाथी शनिवार की रात 12 बजे कन्या छात्रावास पहुंच गए। इस छात्रावास में 58 छात्राएं रहती हैं। इसके अलावा परिसर में कटहल का पेड़ है, जो फलों से लदा हुआ है। इसी की सुगंध पाकर बाउंड्रीवाल तोड़कर हाथी परिसर में घुस गए। उनके आने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम हड़बड़ाकर मौके पर पहुंची। टीम की नजरों के सामने हाथियों ने छात्रावास के गार्ड रूम के दरवाजे और खिड़की को भी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना में किसी भी छात्रा के घायल होने की सूचना नहीं है। टीम ने पूरी रात मौके पर रहकर स्थिति पर नजर रखी। हाथी परिसर से चले गए हैं लेकिन, आसपास विचरण कर रहे हैं। दोबारा कब धमक जाए, यह कहां नहीं जा सकता। इसलिए प्रशासन सबसे पहले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। इसके लिए लगातार मुनादी कराई जा रही है, ताकि लोग सतर्क रहे। शाम होने के बाद घर से बाहर न निकले और हाथियों की जानकारी मिलने के बाद तत्काल सूचना देने की अपील की जा रही है। छात्रावास की बाउंड्रीवाल क्षतिग्रस्त करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी हाथी बाउंड्रीवाल को तोड़कर रास्ता बना चुके हैं। बार-बार बाउंड्रीवाल टूटने से छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इधर जानकारों का मानना है कि यह कभी हाथियों का मार्ग रहा होगा। इसलिए वह बार-बार आते हैं। इस दौरान उनके मार्ग पर जिस तरह के अवरोध आते हैं, उन्हें हाथी तोड़ देते हैं। वन विभाग को जैसे ही इस बात का पता चला कि हाथी कटहक की सुगंध पाकर परिसर में घुसे थे। उन्होंने ठोस निर्णय लेते हुए तत्काल पेड़ में जितने भी पके कटहल से उन्हें तुड़वा दिया। जिससे की हाथी अब दोबारा परिसर में कटहल खाने की लालच में न आए। इसके साथ ही छात्रावास में निगरानी बढ़ा दी गई है।\ अब छात्रावास के किनारे-किनारे खोदेंगे पांच फीट का गड्ढा खतरा पूरी तरह नहीं टला। हाथी दोबारा छात्रावास परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए छात्रावास अधीक्षक को हाथियों से बचाव के लिए करीब पांच फीट गहरा गड्डा खोदकर सुरक्षा उपाय करने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं। इससे हाथी भीतर नहीं आ पाएंगे।
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