राष्ट्रवाणी: सिनेमा जगत के लोकप्रिय गायक कुमार सानू ने संग खास बातचीत में कई अहम पहलुओं पर खुलकर चर्चा की है। बॉलीवुड के फेमस सिंगर कुमार सानू (फोटो क्रेडिट- फेसबुक) 1984 में कुमार सानू ने गाया था पहला हिंदी गीत दिग्गज गायक के तौर पर मशहूर हैं सानू दा इस संगीतकार की जोड़ी ने दी थी अहम सलाह दीपेश पांडेय, मुंबई: अपने करीब चार दशकों के म्यूजिकल सफर में बीस हजार से ज्यादा गाने गा चुके गायक कुमार सानू (Kumar Sanu) संगीत के मामले में समर्पण को महत्वपूर्ण मानते हैं।
इन दिनों अलग-अलग गानों की गायिकी के साथ वह सिंगिग रियलिटी शो सारेगामापा: हिंदुस्तान का संगीतस्थान में जज की भी भूमिका निभा रहे हैं। उनसे बदलते संगीत जगत, उनके पेशेवर सफर, एआई के प्रभाव समेत कई विषयों पर बातचीत: अब लोगों में अपने काम के प्रति समर्पण में कमी आ गई है। पहले संगीतकार, गीतकार, गायक हर किसी में समर्पण होता था।
समर्पण के साथ सभी में डर नाम की चीज भी होती थी। जैसे अगर मैंने गाना गाया, मुझे डर ये होता था कि हमें अपना ट्रैक एक ही बार में सही से गाना पड़ेगा। इसी डर से समर्पण आता था।
हम सोच लेते थे कि हमको कोई गलती करनी ही नहीं है, क्योंकि अगर मैंने गलती की तो संगीतकार देखकर हंसेंगे। आज वो डर किसी में नहीं है। अब लोगों को पता है कि वो गाने का ट्रैक एक साथ नहीं, बल्कि तकनीकी की मदद से टुकड़ों में भी रिकार्ड कर सकते हैं, तो कोई समस्या नहीं।
इससे वो निश्चिंत हो जाते हैं, वही से गानों की गुणवत्ता में कमी आ रही है। उन्होंने एक ही चीज बताई थी कि जो भी काम करने जा रहे हो, उसमें परफेक्ट होकर जाना। नहीं तो मुंह के बल गिर जाओगे या खुद ही पीछे हट जाओगे।
इतना तैयार होकर जाओ कि अगर सामने वाला चाहे फिर भी आपको हटा न सके। अब तो मैं देखता हूं कि लोग परफेक्ट न भी हो, तो भी चले जाते हैं खुद को आजमाने। पेशेवर गायक न हो फिर भी गा लेते हैं।
आजकल तो एआई भी आ गया है, वो तो और खतरनाक चीज है। सोचिए, मशीन से गाने लिखना और उन्हीं से गवाना कितना अजीब चीज है? मशीनों से बनाए और इंसानी रचनात्मकता से बनाए गानों के असर में बहुत फर्क है।
जिस गाने को गीतकार परिस्थितियों को समझकर लिखता है, संगीतकार हारमोनियम पर बैठकर उसका संगीत बनाता है, गायक परिस्थितियों और भावों को समझकर उसे गाता है, उस गाने का आनंद मशीनों से बने गाने से नहीं मिल सकता है। एआई रचनात्मकता पर बुरा प्रभाव डाल रही है। अपने नियमित रियाज और अभ्यास के अलावा मैंने किसी भी गाने के लिए अलग से रियाज नहीं किया।
मेरी खासियत यही है कि ऊपरवाले ने ऐसा दिमाग दिया है कि मैं बहुत जल्दी चीजों को समझता हूं और उसके अनुसार गाता हूं। इसलिए मैंने कभी किसी गाने के लिए 13-14 घंटे रियाज करने जैसी कोई चीज नहींकी है। मैंने अपने सारे गाने बिना किसी रियाज के गाया है।
वह शानदार गायिका हैं। बालीवुड में तो अभी दो-चार गाने गाकर अपने सफर शुरू किया है। बाकी तो उसने अपना करियर जो कुछ भी बनाया है, हालीवुड से ही अपने दम पर बनाया है।
उसके बाद मैंने उसको बोला कि अगर आप हिंदी गा सकती हैं, तो चले मेरे साथ गाओ, अनुभव बढ़ेगा। वो हिमेश रेशमिया, शब्बीर समेत बॉलीवुड के कई बड़े संगीतकारों के साथ गा चुकी है। अंग्रेजी गाने में तो मैं उनको कुछ बोल नहीं सकता हूं, लेकिन हिंदी गाने में अगर वो कोई गलती करती हैं, मैं उन्हें तुरंत बताता हूं।
मैं उन्हें सुझाव भी देता हूं कि कैसे सही तरीके से गाया जा सकता है। बतौर जज हमारे पैमाने पूरी तरह से इस पर निर्भर करते हैं कि शो में किस तरह के प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। इस साल सारे प्रतिभागी बहुत प्रतिभाशाली हैं।
ऐसे में हमें भी उन्हें सुनने में मजा आता है। अगर प्रतिभागी खराब है, तो किसी को निकालना हमें बहुत खराब लगता है। इस बार के पैमाने काफी ऊंचे हैं।
इससे पहले शो के जो भी सीजन आए हैं, यह सीजन उनसे प्रतिभागियो, सेट, संगीतकारों समेत हर मामले में सेट कई गुना बड़ा है।

