राष्ट्रवाणी: 61 साल पुराना ये क्लासिकल गाना स्वार कोकिला Lata Mangeshkar ने गाया था और इसे मधुबाला पर फिल्माया गया था। मधुबाला पर फिल्माया गया था ये क्लासिक सॉन्ग एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर की आवाज आज भी करोड़ों दिलों में बसती है और बात अगर क्लासिक सॉन्ग की हो तो यह और भी ज्यादा खास हो जाती है। हालांकि जितने खूबसूरत उनके गाने हैं उतनी ही खूबसूरत उनके पीछे की कहानियां भी हैं। एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा है उनके 61 साल पुराने गाने का। जिसे एक गुजराती रंगमंच पर होने वाले नाटक के लिए लिखा गया था लेकिन बाद में इसके बोल लिखने वाले लिरिसिस्ट ने फिल्म के हिसाब से इसे ढाल दिया। इस गाने को बॉलीवुड की सबसे सफल और खूबसूरत एक्ट्रेसेस में से एक मधुबाला पर फिल्माया गया था। दरअसल यह किस्सा 1960 में रिलीज हुई फिल्म मुगल-ए-आजम (Mughal-E-Azam) का है। जिसका गीत ‘मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे’ (Mohe Panghat Pe) लता मंगेशकर द्वारा गाया गया था। लेकिन इस गीत के लिरिक्स और धुन गुजराती कवि और नाटककार रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने लिखे थे, वो भी एक रंगमंच नाटक के लिए। लेकिन जब मेकर्स ने इसे फिल्म का हिस्सा बनाने के बारे में सोचा तो इसे उसके हिसाब से ढाल दिया गया। फिर उस वक्त की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला (Madhubala) पर इसे फिल्माया गया है। यह गीत श्रीकृष्ण और राधा के पौराणिक छेड़छाड़ व प्रेमलीला का वर्णन करता है और इसे मुगल-ए-आजम में अनारकली के किरदार में मधुबाला पर बहुत ही खूबसूरत तरीके से फिल्माय गया। इस गाने को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने गाया है और इसका संगीत प्रसिद्ध म्यूजिशियन नौशाद ने दिया है वहीं इसके लिरिक्स शकील बदायूनी ने लिखे हैं। मुगल-ए-आजम 1960 में बनी एक ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म है, जिसे के. आसिफ ने प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था। पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार, मधुबाला और दुर्गा खोटे की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म मुगल राजकुमार सलीम और दरबार की नर्तकी अनारकली के प्रेम प्रसंग पर आधारित है। सलीम के पिता, सम्राट अकबर, इस रिश्ते को मंजूरी नहीं देते, जिसके कारण पिता और पुत्र के बीच युद्ध छिड़ जाता है।

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version