नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर और मालदीव के उनके समकक्ष अब्दुल्ला खलील सोमवार को भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के कार्यान्वयन की समीक्षा करेंगे. खलील एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिवसीय यात्रा पर रविवार शाम दिल्ली पहुंचे. इस साल यह उनकी तीसरी भारत यात्रा है.

व्यापक, आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी पर भारत-मालदीव दृष्टि पत्र को पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपनाया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”मालदीव के विदेश मंत्री खलील का भारत में गर्मजोशी से स्वागत है.” विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि विदेश मंत्री खलील की यात्रा भारत और मालदीव के बीच ”उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ता” के लिए है.

मंत्रालय ने कहा कि खलील व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी पर भारत-मालदीव दृष्टि पत्र के कार्यान्वयन में प्रगति की निगरानी के लिए दूसरे उच्च स्तरीय कोर ग्रुप (एचएलसीजी) की बैठक में मालदीव का नेतृत्व करेंगे. खलील, जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”मालदीव, भारत का प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और भारत की ‘पड़ोस पहले’ नीति और विजन ‘महासागर’ में एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र प्रगति है.” बयान के अनुसार, ”इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना है.” चीन समर्थक मुइज्जू द्वारा नवंबर 2023 में राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद भारत और मालदीव के बीच संबंधों में काफी तनाव आ गया था.

पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर, उन्होंने मालदीव से भारतीय सैन्य र्किमयों को वापस बुलाने की नयी दिल्ली से मांग की थी.
पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान मुइज्जू ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया, जिसके बाद संबंधों में कुछ सुधार हुआ है.

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