लंदन. भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा सर्मिथत एक नये रामानुजन कनिष्ठ अनुसंधानकर्ता कार्यक्रम के तहत भारतीय प्रतिभाशाली सैद्धांतिक भौतिकविदों और गणितज्ञों को संयुक्त अनुसंधान के लिए ‘लंदन इंस्टीट्यूट फॉर मैथमेटिकल साइंसेज’ (एलआईएमएस) लाया जाएगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर की हाल की भारत यात्रा के दौरान शुरू की गई इस योजना का नाम प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन और ब्रिटिश गणितज्ञ जी एच हार्डी की मित्रता के सम्मान में रखा गया है. एलआईएमएस के निदेशक डॉ. थॉमस फिंक ने कहा, ”हमारा रामानुजन कनिष्ठ अनुसंधानकर्ता कार्यक्रम, विज्ञान की दो महाशक्तियों के बीच प्रतिभाओं के आदान-प्रदान के लिए एक सेतु का काम करेगा.” उन्होंने कहा,”रामानुजन ने हार्डी के साथ मिलकर जो काम किया, उसने गणितीय विज्ञान को पूरी तरह बदल दिया.” उन्होंने कहा कि इस सहयोग ने भारत के कुछ प्रतिभाशाली लोगों का ‘रॉयल इंस्टीट्यूशन’ में स्वागत करने के लिए प्रेरित किया.

सरकारी समर्थन हासिल करने के अभियान का नेतृत्व ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने किया तथा भारत सरकार के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर कृष्णास्वामी विजयराघवन ने भी इसमें सहयोग दिया. दोरईस्वामी ने कहा, ”हार्डी और रामानुजन की कहानी हमें याद दिलाती है कि विज्ञान अलगाव से नहीं, बल्कि मित्रता और संवाद से आगे ब­ढ़ता है.” उन्होंने कहा, ”यह कार्यक्रम युवा भारतीय वैज्ञानिकों को रामानुजन जैसा ही अवसर प्रदान करेगा. वे दुनिया के सबसे प्रेरक वातावरण में अपने विचारों को परख सकेंगे.”

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