नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट के मामले की सुनवाइयों के दौरान की गईं उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियां याद दिलाती हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं.

इससे पहले दिन में उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर किए गए पोस्ट के लिए गिरफ्तार महमूदाबाद को अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. प्रोफेसर के ऑनलाइन पोस्ट की समीक्षा करने वाली न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने उनके शब्दों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका इस्तेमाल जानबूझकर दूसरों को अपमानित करने या असहज करने के लिए किया गया था.

पीठ ने कहा कि हालांकि सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन सोनीपत स्थित अशोका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष महमूदाबाद द्वारा की गई टिप्पणी ‘डॉग व्हिसलिंग’ (किसी का समर्थन पाने के लिए गुप्त संदेश वाली भाषा) की तरह लगती है जिसका इस्तेमाल कानूनी शब्दावली में किया जाता है.

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”उच्चतम न्यायालय ने प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन गंभीर चिंताएं जताईं.” उन्होंने मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत की पीठ द्वारा की गई टिप्पणियों का हवाला दिया और कहा, ”यह सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है. यह याद दिलाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ आती है.” मालवीय ने कहा, ”ऐसे समय में जब कोई राष्ट्र कमजोर पड़ता है, तो एकता ताकत का रूप ले लेती है. जब हमारे देशवासी आपकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो शायद कम से कम हम जो कर सकते हैं, वह यह है कि ऐसी टिप्पणियों से बचा जाए जो विभाजनकारी या मनोबल गिराने वाली हों.” उन्होंने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता का असंवेदनशीलता के साथ घालमेल नहीं करना चाहिए.

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