नयी दिल्ली/बेलगावी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने को लेकर सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत की सोमवार को आलोचना की और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान नेता पर भारत के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगाया. मंत्री ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को पानी नहीं दिया जाएगा.

टिकैत ने पहलगाम आतंकी हमले के परिणामस्वरूप सिंधु जल संधि को स्थगित करने के सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी.
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो क्लिप में टिकैत ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित नहीं करना चाहिए था, क्योंकि इससे पड़ोसी देश के आम लोग, खासकर किसान प्रभावित होंगे.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री चौहान ने टिकैत की टिप्पणी के बारे में पूछने यहां संवाददाताओं से कहा, ह्ल कुछ लोग मोदी सरकार का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगे हैं. हम बेगुनाहों का खून बहाने वालों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पानी नहीं देंगे.ह्व भाजपा ने बीकेयू अध्यक्ष पर ”पाकिस्तान की भाषा” बोलने का आरोप लगाया और उनसे माफी की मांग की.

भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष और सांसद राजकुमार चाहर ने आरोप लगाया, ”नरेश टिकैत पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं. उनका कहना है कि पानी रोकने का सरकार का फैसला गलत है. उनका कहना है कि सभी पाकिस्तानी दोषी नहीं हैं, केवल कुछ लोगों ने ही यह (आतंकवादी हमला) किया है.” चाहर ने कहा, ”मैं उनकी टिप्पणियों की कड़ी निंदा करता हूं. उन्हें ऐसी टिप्पणियां करने में शर्म आनी चाहिए. उन्होंने भारत के खिलाफ बोला है. उन्हें देश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए.” भाजपा नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़े फैसले लिए हैं, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल है. उन्होंने कहा, ”आने वाले दिनों में और प्रभावी फैसले लिए जाएंगे.” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने टिकैत का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और कहा कि नेताओं को सिर्फ टीवी चैनलों और अखबारों में दिखने के लिए इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, “पहलगाम आतंकी हमले के बाद पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट होकर खड़ा है. भारत आतंकी हमले का बदला लेना चाहता है. पूरा देश और पाकिस्तान भी इस संदेश से वाकिफ हैं कि कूटनीतिक कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी की जाएगी.” मौर्य ने कहा, “अगर उनमें हिम्मत होती तो उन्हें हमारे सैनिकों से लड़ना चाहिए था. लेकिन उन्होंने निहत्थे लोगों को मार डाला.” उन्होंने कहा, “उन्हें कौन माफ करेगा? उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी.” बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह जांच का विषय है कि हमले की साजिश किसने रची, कैसे आतंकवादी पाकिस्तान से आए और 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर चले गए.

उन्होंने 22 अप्रैल को हुए हमले के पीड़ितों में से एक लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार से मुलाकात करने के बाद करनाल में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पूरा देश सदमे में है. पूरी कश्मीर घाटी सदमे में है. फिर किसे फायदा होगा? उनका उद्देश्य क्या था? सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए. इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.” टिकैत ने कहा कि सरकार को दुनिया में पाकिस्तान की खराब छवि को देखते हुए सीमा सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए और घुसपैठियों से निपटने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को हथियार मुहैया कराने चाहिए.

उन्होंने कहा, “कुछ करो… देश चाहता है कि भारत सरकार कुछ करे.” राकेश टिकैत ने भी पहलगाम हमले के बाद सरकार की कार्रवाई पर कथित तौर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को उन लोगों को पकड़ना चाहिए जो इस घटना से लाभान्वित हो रहे हैं.
उन्होंने पूछा, ”क्या कश्मीर के लोग, जो पर्यटन और फलों-सब्जियों की बिक्री पर निर्भर हैं, वहां ऐसी घटना को अंजाम देकर समृद्ध होंगे?” किसान नेता ने कहा, ”उन लोगों को पकड़ो जो इससे (आतंकवादी हमले) लाभान्वित हो रहे हैं, वरना इस तरह की घटनाएं होती.

पहलगाम आतंकी हमला: कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने सुरक्षा चूक की निंदा की, केंद्र को जिम्मेदार ठहराया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के समय सुरक्षा व्यवस्था न होने की आलोचना की और कहा कि क्या यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तहत सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की ”विफलता” नहीं है. कांग्रेस नेता ने ”युद्ध की कोई आवश्यकता नहीं” संबंधी अपनी कथित टिप्पणी की आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे ”दुष्प्रचार” करार दिया तथा केंद्र सरकार को उसकी ”विफलताओं” के लिए जवाबदेह ठहराया.

मुख्यमंत्री यहां ‘संविधान बचाओ और मूल्य वृद्धि विरोधी रैली’ को संबोधित कर रहे थे, जिसमें कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, कई कांग्रेस नेता और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्य शामिल हुए. उन्होंने कहा, ”जब आतंकवादियों ने कर्नाटक के लोगों सहित कई लोगों की हत्या की, तो वहां एक भी पुलिसकर्मी नहीं था. वहां भारतीय सेना का एक भी जवान नहीं था. क्या यह सुरक्षा विफलता नहीं है? कुछ साल पहले पुलवामा में आतंकवादी घटना हुई थी. खुफिया विभाग और सुरक्षा बल क्या कर रहे थे?” सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ”पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई. इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह किसकी विफलता है? क्या यह नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की विफलता नहीं है?” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, ”जब प्रेस के लोगों ने मैसूर में मुझसे युद्ध की जरूरत के बारे में पूछा. मैंने जवाब दिया कि अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है. लेकिन अगर अपरिहार्य हुआ तो हमें देश की एकता और अखंडता के लिए तथा इसकी रक्षा के लिए युद्ध करना होगा – हम हमेशा युद्ध के लिए तैयार हैं.” सिद्धरमैया ने कहा, ”आतंकवादियों को जड़ से उखाड़ने के बजाय… सभी को सुरक्षा देने के बजाय, विफलताओं को छिपाने के लिए, भाजपा मुझे निशाना बनाने की कोशिश कर रही है. कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी इस काम में मदद कर रही है. मैंने जो कहा वह कुछ और था और लोगों को जो दिखाया एवं पेश किया गया वह कुछ और था. ऐसा नहीं किया जाना चाहिए.”

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