राष्ट्रवाणी: परेश रावल ने बेटे आदित्य रावल के साथ फिल्म ‘पास्ट टेंस’ में पहली बार काम करने का अनुभव शेयर किया। परेश रावल के साथ काम कर रहे उनके बेटे आदित्य परेश रावल ने बेटे आदित्य संग किया काम अच्छी आर्ट फिल्मों को सपोर्ट करना जरूरी है आदित्य ने पिता संग अभिनय को बताया रोमांचक दीपेश पांडेय, मुंबई।
हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और उनके बेटे अभिषेक बच्चन से लेकर जैकी श्राफ और उनके बेटे टाइगर श्राफ समेत सिनेमा के पर्दे पर पिता और पुत्र की वास्तविक जोड़ी कई बार देखने को मिली है। इसी क्रम में अभिनेता परेश रावल (Paresh Rawal) ने फिल्म पास्ट टेंस में पहली बार अपने बेटे और अभिनेता आदित्य रावल (Aditya Rawal) के साथ काम किया है।
अभिनय के अलावा लेखन में भी दिलचस्पी रखने वाले आदित्य बतौर लेखक भी अपने पिता की दो फिल्में (जो तेरा है वो मेरा है और डियर फादर) लिख चुके हैं। वह अपने अनुभवी पिता के साथ अभिनय करने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण उनके लिए लिखना मानते हैं। मुंबई में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान पिता-पुत्र की जोड़ी ने की बातचीत: फिल्म पास्ट टेंस करने को लेकर परेश कहते हैं, ‘मैं तो इस फिल्म से दूर रहना चाहता था कि कहीं किसी को ऐसे न लगे कि बेटे के साथ पैकेज में पिता भी आ रहा है।
फिर मुझे यह फिल्म अच्छी लगी, मन में आया कि ऐसी फिल्मों को जितना ज्यादा हो सके उतना सपोर्ट करना चाहिए। जिस तरह से निर्देशक अनंत महादेवन ने फिल्म को बनाया है, उसमें मुझे बहुत मजा आया। उम्मीद करता हूं कि उनके साथ मुझे कोई दूसरी अच्छी फिल्म करने का मौका मिले।
सच बात ये है कि मेरे नसीब में इस किस्म की (आर्ट) फिल्में बहुत कम आती हैं।’ आगे परेश कहते हैं, ‘मेरे पास आर्ट फिल्मों को नाम पर जो भी फिल्में आती हैं, उनमें से सब अच्छी नहीं होती हैं। उनमें से कई फिल्में ऐसी होती हैं कि आप दिलचस्पी के साथ उनकी स्क्रिप्ट के 10 पेज भी नहीं पढ़ सकते हैं।
यह जरूरी नहीं है कि आर्ट फिल्म है तो अच्छी ही हो। हां, मन में यह बात आती है कि अच्छी आर्ट फिल्म मेरे पास क्यों नहीं आई। मुझे लगता है कि फिल्मकारों को डर लगता है कि ये तो ज्यादा पैसे मांगेगा।
जबकि मेरा कहना है कि पैसों की बात तो बाद में आती हैं, पहले स्क्रिप्ट तो अच्छी लगने दो।’ वहीं बतौर अभिनेता ऐसी फिल्मों को सपोर्ट करने को लेकर परेश कहते हैं, ‘आर्ट फिल्म हो या कोई कमर्शियल फिल्म मुझे बस स्क्रिप्ट अच्छी लगनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति मेरे पास अच्छी आर्ट फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर आता है, तो मैं भला क्या उससे पैसों की बातें करने बैठूंगा।
ऐसे नहीं होता है। प्राथमिकता तो स्क्रिप्ट ही होती है।’ वहीं आदित्य पहली बार अपने पिता के साथ बतौर अभिनेता फिल्म करने के अनुभवों को लेकर बताते हैं, ‘जब मैंने सुना कि फिल्म में उनके साथ शूटिंग करनी है, तो सच कहूं तो बस मन में एक उत्सुकता थी कि उनके साथ अलग-अलग सीन करने का मौका मिलेगा।
शूटिंग शुरू करने से पहले हमने साथ में एक-दो स्क्रिप्ट रीडिंग सेशन भी किया था, तो उससे हमारा तालमेल आपस में बन गया था। उसके अलावा साथ में निर्देशक अनंत महादेवन सर भी थे तो ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं थी। मुझे बस अपनी तैयारी करके सेट पर जाना था।
मुझे सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात की थी कि फिल्म में हमारे पात्र पहले कभी एक दूसरे से मिले नहीं होते हैं। जबकि हम घर में साथ ही रहते हैं, ऐसे में मुझे उनके साथ पहली बार मिलने वाला रिश्ता बनाना ज्यादा दिलचस्प लगा। बाकी कोई डरने वाली बात नहीं थी।
भले ही हम एक ही घर में वर्षों से रहते आए हैं, एक साथ ही कई फिल्में और नाटक भी देखा है, लेकिन फिल्म में उनके सामने काम करके बहुत कुछ सीखने को मिला।’ पिता परेश के साथ बतौर सह अभिनेता और लेखक दोनों में से ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम पर आदित्य कहते हैं, ‘दोनों की अपनी-अपनी चुनौतियां होती हैं।
बतौर सह अभिनेता आपको थोड़ी कम फिक्र करनी होती है, क्योंकि तब आप अपना काम देख रहे होते हैं, और निर्देशक का मार्गदर्शन भी होता है। वहीं बतौर लेखक ज्यादा सोचने और संभालने वाली चीजें होती हैं। वहां पर मेरे लिए चिंता की बात ज्यादा रहती है क्योंकि वहां तो कहना पड़ता है कि फलां लाइन आपने बराबर नहीं बोली है।’

