राष्ट्रवाणी: भारतीय रिजर्व बैंक ने अब बैंक डिपॉजिट्स को कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में शामिल करने का फैसला किया है। इससे …और पढ़ें आरबीआई ने बैंक डिपॉजिट्स को CAS में शामिल करने का एलान किया। FD, शेयर, म्यूचुअल फंड अब एक ही स्टेटमेंट में ट्रैक होंगे।
वित्तीय प्रबंधन और लोन प्रक्रिया होगी अब और भी आसान। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम ग्राहकों और निवेशकों की सुविधा के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में एलान के मुताबिक, अब आपके बैंक डिपॉजिट्स (जैसे सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD) की जानकारी भी ‘कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट’ (CAS) में शामिल की जाएगी।
अभी तक आपको CAS में सिर्फ डीमैट खाते से जुड़े निवेश जैसे शेयर (Stocks), बॉन्ड्, और म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) का ही ब्योरा मिलता था। लेकिन इस नए नियम के तहत, आरबीआई और सेबी के तालमेल से बैंक डिपॉजिट्स को भी इसमें जोड़ दिया जाएगा। अकाउंट एग्रीगेटर (Account Aggregator) फ्रेमवर्क के जरिए यह नई व्यवस्था 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है, जिससे आपका पूरा फाइनेंशियल पोर्टफोलियो एक ही डैशबोर्ड या स्टेटमेंट पर नजर आने लगेगा।
इस बड़े बदलाव का सबसे अहम फायदा यह है कि अब आपको अलग-अलग बैंकों में मौजूद अपनी FD या जमा राशि को ट्रैक करने के लिए कई बैंकिंग ऐप्स या स्टेटमेंट खंगालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोन लेने की प्रक्रिया भी इससे काफी तेज और आसान हो जाएगी, क्योंकि आप अपना पूरा वित्तीय डेटा एक ही जगह से सुरक्षित तरीके से लेंडर्स को दे सकेंगे।
इसके अलावा, किसी खाताधारक के निधन के बाद परिवारों के लिए अलग-अलग बैंकों में बिखरी FD और निवेश को ढूंढना पहले एक बड़ी चुनौती होती थी, लेकिन अब सिंगल स्टेटमेंट से नॉमिनेशन और क्लेम सेटलमेंट जैसे काम बेहद आसान हो जाएंगे।

