नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हुए कायरतापूर्ण हमले का जवाब देने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों को पूरी आजादी दी गई थी. सिंह ने यह भी कहा कि भारत की कार्रवाई ‘नियत’ और ‘तनाव न ब­ढ़ाने वाली’ थी.
रक्षा मंत्री ने रविवार को मोरक्को के रबात में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यह बात कही. सिंह उत्तरी अफ्रीकी देश की दो-दिवसीय यात्रा पर हैं.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने दोहराया कि पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हुए कायरतापूर्ण हमले का जवाब देने के लिए सशस्त्र बल पूरी तरह से तैयार थे और उन्हें पूरी आजादी दी गई थी. बयान के अनुसार, उन्होंने देश के दृ­ढ़, लेकिन संयमित दृष्टिकोण का वर्णन करने के लिए रामचरितमानस का हवाला देते हुए कहा, ”हमने धर्म देखकर नहीं, कर्म देखकर मारा है.” जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने छह-सात मई की दरमियानी रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले क्षेत्रों (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया.

इस हमले के बाद चार दिनों तक भीषण युद्ध हुआ, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुआ. राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत की बहुआयामी प्रगति पर प्रकाश डाला और कहा कि वैश्विक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज गति से ब­ढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है और जल्द ही शीर्ष तीन में शामिल होने के लिए तैयार है.

रक्षा मंत्री ने भारत के डिजिटल क्षेत्र में आए बदलाव, ज्ञान अर्थव्यवस्था में तेज प्रगति और एक दशक पहले के 18 यूनिकॉर्न से 118 स्टार्टअप्स तक के सफर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योग ने 1.5 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और 100 से अधिक देशों को 23,000 करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा निर्यात की उपलब्धि हासिल की है. सिंह ने भारतीय समुदाय की कड़ी मेहनत, समर्पण और ईमानदारी की प्रशंसा की.

सिंह की मोरक्को यात्रा किसी भारतीय रक्षा मंत्री द्वारा की गयी देश की पहली यात्रा भी है. इस यात्रा के दौरान सिंह मोरक्को के अपने समकक्ष अब्देलतीफ लौदियी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. दोनों पक्षों की बातचीत के उपरांत रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है.

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