राष्ट्रवाणी: ननद-भाभी का रिश्ता खट्टी-मीठी नोंक-झोंक से भरा होता है। इसी रिश्ते को ननदी करेली मनमानी गीत बहुत खूबसूरती से बयां करता है। ननद-भाभी के खट्टे-मीठे रिश्ते की तस्वीर है ये बिहारी गीत (एआई Generated Image) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
बिहार के भोजपुरी गाने सिर्फ फिल्मी गानों तक सीमित नहीं हैं। यहां के लोकगीत बिहार की असली संस्कृति का आईना हैं। इन्हीं गीतों में ननदी करेली मनमानी भी शामिल है।
ये गीत ननद और भाभी के रिश्ते के ताने-बाने को बहुत ही खूबसूरत और मजेदार अंदाज में बयां करता है। इस गीत में एक महिला की उसकी ननद के लिए शिकायत को जाहिर किया गया है, जो वो अपने पति से करती है। आइए जानें क्या कहता है ये गीत।
ये गीत एक महिला और उसके पति के बीच के संवाद को दिखाता है। इस गीत में महिला अपने पति से अपनी ननद का उलाहना करती है और बताती है कि उसे क्या-क्या परेशानी हो रही है। गीत की शुरुआत में महिला कहती है ननदी करेला मनमानी, ऐ राजा हमके बाटे परेशानी।
दिनभर ननदी हमसे मांगेली पानी, समझेली घर के नौकरानी ऐ राजा हमके बाटे परेशानी। महिला कहती है कि मेरी ननद पूरे दिन मनमानी करती है और बार-बार मुझसे ही पानी मांगकर पीती है। उसने मुझे घर की नौकरानी समझ लिया है।
अपने पति को ऐ राजा कहते हुए महिला कहती है कि ननद के इस व्यवहार से मुझे परेशानी होती है। इस गीत में आगे महिला कहती है दिनभर ननदी मुंह चलावे, आंख दिखावे, राजा हमें वो डरावे, समझे न घर के प्राणी ऐ राजा हमके बाटे परेशानी। यानी ननद रानी दिनभर ताने कसती है, आंखें दिखाती है और मुझे डराती है।
वो मुझसे घर के सदस्य जैसा व्यवहार नहीं करती। ननद के इस रवैये से मुझे बड़ी परेशानी होती है। इस गीत में आगे महिला पति से कहती है सासु ने ननदी सैंया अगिया लगावे, हमके पिया बात उनकी एक नहीं भावे, बनेली ऊ बड़की खानदानी ऐ राजा हमके बाटे परेशानी।
यानी ननद दिनभर सास के कान भरकर सास-बहू में लड़ाई करवाती है और खुद को बड़े खानदान का समझती है। हालांकि, पूरे गीत में महिला अपनी ननद की शिकायत अपने पति से करती है, लेकिन इसके पीछे उसका अपने पति पर विश्वास छिपा है। उसे लगता है कि पति उसकी बात सुनेगा और उसकी ननद से उसे परेशान न करने के लिए कहेगा।

