नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के महत्व पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि नियामक सतर्कता एवं वृद्धि समर्थक मानसिकता के बीच संतुलन बनाने की सीसीआई की क्षमता एक लचीले, न्यायसंगत और नवाचार-संचालित आर्थिक ढांचे के निर्माण के लिए अभिन्न अंग साबित होगी।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 16वें वार्षिक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। कॉरपोरेट मामलों की मंत्री सीतारमण ने कहा कि नियामक को बाजार में बदलावों का अनुमान लगाना होगा और समय की जरूरतों के अनुरूप प्रासंगिक बने रहना होगा।

मंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ वृद्धि समर्थक मानसिकता के साथ नियामक सतर्कता के बीच संतुलन बनाने की आयोग की क्षमता एक लचीले, न्यायसंगत और नवाचार-संचालित आर्थिक ढांचे के निर्माण के लिए अभिन्न अंग होगी…।’’

नई प्रौद्योगिकियों के उद्भव पर, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की प्रभारी सीतारमण ने कहा कि कृत्रिम मेधा..प्रौद्योगिकियां बाजार की शक्ति, पारर्दिशता, डेटा तक पहुंच, एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रहों और प्रतिस्पर्धी नुकसान की गुंजाइश के बारे में नए सवाल उठाती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ स्वतंत्र और निष्पक्ष डिजिटल बाजारों को.. ‘गेटकीपर प्लेटफॉर्म’ के उद्भव, डेटा एक्सेस में विषमता एवं डिजिटल बिजनेस मॉडल के सीमा पार निहितार्थों से चुनौती मिल रही है। सीमा पार डिजिटल एकाधिकार का उदय वैश्विक सहयोग और चुस्त विनियमन की मांग करता है।’’ मंत्री ने कहा कि नियामक ढांचे को उन संयोजनों के लिए तेजी से मंजूरी देने में भी मदद करनी चाहिए जो प्रतिस्पर्धा को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

इस कार्यक्रम में, सीतारमण ने सार्वजनिक खरीद अधिकारियों के लिए ‘डायग्नोस्टिक टूलकिट’ के साथ-साथ संयोजनों पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी जारी किए। सीसीआई निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और बाजार में प्रतिस्पर्धी प्रथाओं को रोकने के लिए काम करता है। इसके अलावा, एक निश्चित सीमा से परे विलय एवं अधिग्रहण के लिए नियामक की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

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