राष्ट्रवाणी: अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर ने फिल्म मिर्जापुर- द मूवी की सफलता से क्या फायदा मिला है। मिर्जापुर- द मूवी में निभाया अहम किरदार माता-पिता की सीख पर बोलीं श्रिया पिलगांवकर प्रियंका सिंह, मुंबई: एक ही माध्यम पर काम करने से लोग सोच लेते हैं कि आप केवल उसी माध्यम में बंध गए हैं।
यह मानना है अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर का, तभी उनका ध्यान अब सिनेमा की ओर है। वह कहती हैं कि मैंने अपने सफर की किसी से तुलना नहीं की है, कुछ चीजें हैं, जो मेरे मन मुताबिक नहीं भी हुई हैं, लेकिन मैं निराश नहीं हुई। जब एक के बाद एक वेब सीरीज कर रही थी, तो फिल्मों को एक्सप्लोर करना था, लेकिन तब नहीं हो पा रहा था।
मुझे काम करना था और ओटीटी पर काम मिल रहा था। तब ऐसा था कि जो मिल रहा है, वह करते रहो। अब मैं फिल्मों पर फोकस कर रही हूं, ऐसे में मिर्जापुर: द मूवी फिल्म का हिट होना मेरे लिए फायदेमंद है, क्योंकि इंडस्ट्री का नजरिया फिर बदलता है।
ऑक्स आफिस पर सफलता जरूरी है। देखते हैं यह सफलता मेरे लिए क्या नए दरवाजे खोलेगी। अपने माता-पिता को लेकर श्रिया ने खुलकर बात करते हुए बताया है- मैं उनके इन विचारों को सच साबित नहीं करना चाहती हूं।
जैसे ही फिल्मों पर ध्यान दिया, मिर्जापुर: द मूवी के बाद हैवान मिल गई, अब वीरदास के साथ एक हॉरर फिल्म भी कर रही हूं। जब मेरे माता-पिता (सुप्रिया पिलगांवकर और सचिन पिलगांवकर) ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी, तो टीवी और फिल्म ही थे, इसलिए उन्होंने इस स्तर का स्टारडम देखा है। आप अपने किरदारों से ही दर्शक कमा सकते थे।
उनके साथ अलग कनेक्शन था। अब अलग-अलग रास्ते खुल गए हैं। मेरे पात्रों को दर्शकों ने सराहा है, वह मैं अनुभव कर चुकी हूं।
फिर भी लगता है कि बेहतर मौकों के लिए एक कमर्शियल फिल्म जरूरी है, उसकी सफलता मौके बढ़ाएगी। इसके साथ ही प्रतिभा होनी भी इस शो बिजनेस में जरूरी है। बड़ी फिल्म है और उसमें किरदार में करने के लिए कुछ नहीं है, तो नहीं करूंगी, ऐसी कहानियों को सपोर्ट करना है, जिसमें मुझे परफार्म करने का मौका मिले।
यह सोच इसलिए स्पष्ट रही है, क्योंकि मैंने अपने माता-पिता को काम करते हुए देखा है की इतने साल के बाद भी वह बने हुए हैं, अपने काम से ही अपना करियर बनाया है, ना की पीआर करके। अच्छा काम ही, अच्छा काम लाता है। मुझे अपना पोटेंशियल पता है कि मैं बड़े पर्दे पर और काम कर सकती हूं।
हालांकि वह मौके आसानी से नहीं मिलते हैं, लेकिन एक पैटर्न को तोड़ना जरूरी है। सिनेमा में ओटीटी की तरह हमेशा लीड रोल मिले, ऐसा जरूरी नहीं। इस पर आगे श्रिया कहती हैं- मैं मानती हूं कि मुझे हर फिल्म में लीड रोल नहीं मिलेंगे।
मैं कोई पुराना बोझ लेकर अपने साथ नहीं चल रही हूं। इस स्टेज पर कमर्शियल फिल्म करने के फायदे यह हैं कि बड़े पर्दे पर अपनी मौजदूगी बना सकती हूं, नहीं तो जैसे टीवी कलाकारों को सिनेमा में काम जल्दी नहीं मिलता, वैसे ही अब ज्यादा ओटीटी पर काम करूंगी, तो फिल्म निर्देशकों को लगेगा कि यह तो ओटीटी एक्टर है।

