हैदराबाद. तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी ने बुधवार को प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सदस्यों से आत्मसमर्पण करने का आग्रह किया. नये डीजीपी का कार्यभार संभालने वाले शिवधर रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना पुलिस के प्रयासों के कारण पिछले पांच से छह महीनों में छत्तीसग­ढ़ के और केंद्रीय समिति की सदस्य पद्मावती उर्फ सुजाता समेत कई माओवादी सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं. रेड्डी 1994 बैच के अधिकारी हैं, जो तेलंगाना खुफिया विभाग के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने जितेंद्र का स्थान लिया, जो मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए थे.

हैदराबाद में संवाददाताओं से बात करते हुए रेड्डी ने माओवादियों से मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “हम आपके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रहेंगे. पुलिस की ओर से कोई उत्पीड़न नहीं होगा इसलिए आप आत्मसमर्पण कर सकते हैं. हम आपकी मदद के लिए यहां हैं.” अधिकारी ने बताया कि पद्मावती को पुलिस की मदद से चिकित्सा उपचार मिल रहा है. उन्होंने कहा, “इसलिए माओवादी पार्टी से बाहर आ जाइए. हम आपके साथ खड़े रहेंगे. हम आपका स्वागत करने के लिए यहां हैं.” भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू के हथियार डालने के समर्थन में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए रेड्डी ने कहा कि वेणुगोपाल ने 15 अगस्त को एक मौखिक और लिखित बयान जारी किया था, जिसमें दावा किया गया था कि वे संघर्ष विराम के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा, “यह फैसला उनके महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को 21 मई को छत्तीसग­ढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा मारे जाने से पहले ही लिया गया था.” वेणुगोपाल के उस पत्र के बाद प्रतिबंधित संगठन के भीतर आंतरिक कलह सामने आ गया, जिसमें “अस्थायी रूप से सशस्त्र संघर्ष का त्याग करने और हथियार डालने” का आह्वान किया गया था.

भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति द्वारा वेणुगोपाल के पत्र को उनका व्यक्तिगत विचार बताकर खारिज करने के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा, “हमारा मानना ??है कि वेणुगोपाल ने यह बयान तभी जारी किया जब उनके तत्कालीन महासचिव बसवराजू जीवित थे और यह उनके केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो में चर्चा के बाद ही हुआ होगा.” वेणुगोपाल के बयान की माओवादी प्रवक्ता जगन द्वारा निंदा किए जाने पर रेड्डी ने कहा कि माओवादियों के आपस में झगड़ने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा, “राज्य की शक्ति बड़ी है. इसलिए बाहर आओ और आत्मसमर्पण करो और विकास का हिस्सा बनो.”

माओवादियों के साथ बातचीत के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा, “हमारा माओवादियों के साथ बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. वास्तव में तेलंगाना में माओवादी समस्या नहीं है सिवाय सीमावर्ती क्षेत्रों के जहां वे कभी-कभार घुसपैठ की कोशिश करते हैं. जब कोई समस्या ही नहीं है तो बातचीत का क्या औचित्य है? हम उनसे आत्मसमर्पण करने के लिए कह रहे हैं.”

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