राष्ट्रवाणी: 40 साल पहले गजल गायक पंकज उधास ने एक ऐसा गीत गाया था, जिसे सुनकर उस वक्त तो थिएटर्स में …और पढ़ें 40 साल पहले पंकज उधास के गाने ने छुए दिल के तार/फोटो- यूट्यूब एक्टिंग के डर से पंकज उधास छोड़ना चाहते थे सदाबहार गाना 40 साल बाद भी गाना सुनकर रो पड़ते हैं लोग थिएटर्स और रिकॉर्डिंग स्टूडियों में रो पड़ी थी ऑडियंस एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली।
गजल गायकी के महारथी पंकज उधास (Pankaj Udhas) ने अपने पूरे करियर में एक से बढ़कर एक गाने दिए हैं। वह मंच पर जब भी कोई गीत गाते हैं, तो लोग उनकी मधुर आवाज में खो जाते हैं। कई बार तो उनके सैड सॉन्ग सुन लोगों की आंखों में आंसू भी आ जाते हैं।
40 साल पहले भी पंकज उधास ने एक ऐसा कालजयी गीत गाया था, जिसे सुनकर रिकॉर्डिंग रूम से लेकर थिएटर्स में मौजूद हर शख्स रोया था। कौन सा था वह गीत जिसे ठुकराने की गलती करने वाले थे गजल गायक चलिए बताते हैं। पंकज उधास (Pankaj Udhas Songs) की आवाज में गाए जिस गीत के बारे में हम इस लेख में आपको बता रहे हैं, वह साल 1986 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म नाम का है, जिसमें संजय दत्त (Sanjay Dutt), अमृता सिंह और कुमार गौरव मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
इस फिल्म का जो गाना सबसे बड़ा हिट हुआ था, उसके लिरिक्स थे ‘चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है’ (Chitthi Aayi Hai Song), जिसे पंकज उधास ने अपनी मधुर आवाज में गाया था। यह बात शायद बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि जब पंकज उधास के पास यह गाना आया था तो उन्होंने इसे गाने से साफ इंकार कर दिया था।
गाने को रिजेक्ट करने की वजह थी एक्टिंग। उन्हें लगा कि नाम में उन्हें एक्टिंग करनी पड़ेगी। इस कारण सिंगर ने फिल्म करने से इंकार कर दिया।
जब पंकज उधास ने फिल्म में ये गाना गाने से इंकार किया, तो राजेंद्र कुमार काफी गुस्सा हो गए। हालांकि, बाद में जब पंकज उधास को ये समझाया गया कि उन्हें एक्टिंग नहीं करनी, बल्कि मंज पर लाइव परफॉर्मेंस की तरह गीत गाना है। तब जाकर पंकज उधास ये गीत गाने को तैयार हुए थे।
संजय दत्त और अमृता सिंह की फिल्म 40 साल पहले जब सिनेमाघरों में आई और जैसे ही थिएटर्स में पंकज उधास की आवाज में ये गाना बजा, तो लोगों की आंखों से खुद ब खुद आंसू निकलने लगे। निर्देशक महेश भट्ट ने खुद एक इंटरव्यू में ये माना था कि चिट्ठी आई है सिर्फ एक गाना नहीं है, बल्कि लोगों के इमोशन्स है।
उस दौर में यह कल्ट क्लासिक गीत अपने देश से दूर रह रहे लोगों के लिए उनकी भावनाओं को व्यक्त करने का एक जरिया था। आज भी यह सदाबहार गीत सुनकर कई लोग रो देते हैं।

