राष्ट्रवाणी: TRAI ने स्पैम और अनचाही कमर्शियल कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। नए फ्रेमवर्क …और पढ़ें TRAI ने कड़े किए एंटी-स्पैम नियम। Photo- ChatGPT. टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।
TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने स्पैम का शक होने वाले कॉल्स को पहचानने के लिए एआई-बेस्ड तरीके जोड़कर और ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉल्स के लिए नए नियम लाकर अनचाहे कमर्शियल कम्युनिकेशन्स से निपटने के अपने फ्रेमवर्क को सख्त कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक टेलीकॉम ऑपरेटर्स को उन नंबरों की जानकारी आपस में शेयर करनी होगी जिनसे स्पैम एक्टिविटी का शक है और जब किसी एक ही सेंडर से जुड़े कई नंबरों को फ्लैग किया जाता है तो आगे की जांच करने की इजाजत होगी।
ये फ्रेमवर्क ऑटोमेटेड कॉल्स के लिए जरूरतें तय करता है, कुछ खास A2P कॉल्स के लिए टर्मिनेशन चार्ज लागू करता है, ग्राहकों को अपील करने की सुविधा देता है और कॉल-मैनेजमेंट एप्लिकेशन्स पर नई पाबंदियां लगाता है। TRAI ने कहा कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स ऐसे नंबरों की पहचान करने के लिए एआई-बेस्ड तरीकों का इस्तेमाल करेंगे जिनमें स्पैम एक्टिविटी की ज्यादा संभावना दिखती है और उनके बारे में जानकारी दूसरे प्रोवाइडर्स के साथ शेयर करेंगे।
ये नया प्रोसेस ऑपरेटर्स को तब ज्यादा सख्त कदम उठाने की इजाजत देता है जब एक ही सेंडर से जुड़े कई नंबरों पर स्पैम की चिंताएं सामने आती हैं। अगर ऑपरेटर्स 10 दिनों के अंदर ऐसे पांच या उससे ज्यादा नंबरों को फ्लैग करते हैं, तो वे उस सेंडर का दोबारा KYC वेरिफिकेशन और फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू कर सकते हैं।
आगे की कार्रवाई में आउटगोइंग सर्विसेज को ब्लॉक करना शामिल हो सकता है, जबकि बार-बार नियम तोड़ने पर कनेक्शन काटा भी जा सकता है। ये बदलाव ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉल्स को भी कवर करते हैं। TRAI ने एप्लिकेशन-टू-पर्सन (A2P) कॉल्स को उन कॉल्स के तौर पर तय किया है जो किसी एप्लिकेशन, सॉफ्टवेयर सिस्टम या ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म के जरिए बिना किसी इंसान के सीधे नंबर डायल किए की जाती हैं।
इस परिभाषा में ऑटो-डायल कॉल्स, रोबोकॉल्स, पहले से रिकॉर्ड किए गए मैसेज और आर्टिफिशियल या रिकॉर्ड की गई आवाज का इस्तेमाल करने वाली कॉल्स शामिल हैं। बिजनेस और बाकी संस्थान जो A2P कॉलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अपने टेलीकॉम प्रोवाइडर को इस सर्विस की जानकारी देनी होगी और इन कॉल्स के लिए इस्तेमाल होने वाले नंबर देने होंगे।
अगर वे A2P कॉल की जानकारी देने में फेल होते हैं, तो TRAI इसे अनचाहा कमर्शियल कम्युनिकेशन मानेगा। नए नियम A2P कॉल्स के लिए प्रति मिनट 5 पैसे तक का टर्मिनेशन चार्ज भी लाते हैं। TRAI उन कॉल्स को इससे छूट देगा जो तय कमर्शियल कम्युनिकेशन्स के लिए बनी नंबरिंग सीरीज से की जाती हैं, साथ ही उन कॉल्स को भी छूट मिलेगी जिन्हें अथॉरिटी खुद खास तौर पर मंजूरी देती है।
ग्राहकों के लिए, इस नए फ्रेमवर्क में एंटी-स्पैम नियमों के तहत की गई संबंधित कार्रवाइयों के खिलाफ अपील करने का सिस्टम दिया गया है। TRAI ने कमर्शियल हेडर्स और कंटेंट टेम्प्लेट्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी सुरक्षा उपाय जोड़े हैं। कॉल-मैनेजमेंट एप्स को तय नंबरिंग सीरीज से आने वाली कॉल्स को हैंडल करते समय पाबंदियों का पालन करना होगा।
वे 140xx, 1600xx या 1601xx सीरीज से आने वाली कॉल्स को पूरी तरह से ब्लॉक, फिल्टर या स्पैम लेबल नहीं कर सकते हैं।
