राष्ट्रवाणी: आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड में शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। यहां रोज उफनती कोटरी नदी को नाव के सहारे पार कर शिक्षक बच्चों को पढ़ाने जाते हैं। बरसात के दौरान हमेशा ऐसे ही हालात रहते हैं। कोयलीबेड़ा विकासखंड का यह दृश्य सिर्फ एक नदी पार करने का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों की तस्वीर है। शिक्षकों को पहले नाव मिलने का इंतजार करना पड़ता है, फिर नदी पार कर पैदल कई किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। उफनती कोटरी नदी में तेज बहाव और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच नाव चलाना किसी खतरे से कम नहीं है। वीडियो में शिक्षक खुद स्वीकार कर रहे हैं कि हर दिन डर के साये में सफर करना पड़ता है, और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार इंटरनेट नेटवर्क भी काम नहीं करता, जिससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने और विभागीय कामकाज में भी परेशानी होती है। शिक्षकों का कहना है कि जिला प्रशासन को कम से कम लाइफ जैकेट जैसी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन कंधों पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है, वही शिक्षक अपनी सुरक्षा को दांव पर लगाकर कर्तव्य निभा रहे हैं।

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