राष्ट्रवाणी (बिलासपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, बिलासपुरः रतनपुर तहसील के सूखाग्रस्त खेतों की प्यास बुझाने और किसानों की उपज बढ़ाने के लिए प्रस्तावित बांसाझाल व्यपवर्तन योजना ने निर्णायक गति पकड़ ली है। ग्राम बिरगहनी में डूबान के लिए चिन्हांकित महज दो एकड़ जमीन के सामाजिक समाघात दल (एसआइए) के सर्वे में यह साफ हो गया है कि इस परियोजना से किसी भी ग्रामीण का आशियाना नहीं उजड़ेगा और न ही किसी परिवार के विस्थापन का दर्द झेलना पड़ेगा।
अक्सर सिंचाई परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर ग्रामीणों के आशियाने टूटने और पुनर्वास को लेकर लंबे विवाद खड़े होते हैं, लेकिन जल संसाधन संभाग कोटा की इस योजना में तकनीकी टीम ने गांव के मूल ढांचे को पूरी तरह बचा लिया है। समाघात दल के भौतिक सत्यापन में सामने आया कि परियोजना के डूबान दायरे में सिर्फ दो एकड़ गैर-आवासीय भूमि ही आ रही है।
किसानों से सीधी चर्चा के बाद उनकी सहमति भी ले ली गई है। दल ने अपनी अनुशंसा रिपोर्ट में स्पष्ट रेखांकित किया है कि सिंचाई विभाग ने मनमाने अधिग्रहण के बजाय सिर्फ उतनी ही भूमि का प्रस्ताव तैयार किया है, जितनी बांध के भराव क्षेत्र के लिए अपरिहार्य है। किसी की निजी अधोसंरचना या बस्ती पर आंच न आने से परियोजना की शुरुआती कानूनी और सामाजिक बाधा पूरी तरह दूर हो गई है।
राजस्व विभाग अब औपचारिकताएं पूरी कर किसानों को शीघ्र अवार्ड पारित कर मुआवजा वितरण की तैयारी में जुट गया है, जिससे बांध का रुका निर्माण जल्द रफ्तार पकड़ सके। बांसाझाल बांध का निर्माण पूरा होते ही क्षेत्र के चार प्रमुख गांवों- बारीडीह, बछालीखुर्द, कुआंजाति और भैंसाझार के किसानों का भाग्य बदल जाएगा।
अब तक केवल बारिश के भरोसे रहने वाले 375 हेक्टेयर (लगभग 926 एकड़) रकबे को पक्की नहरों से बारहमासी सिंचाई का पानी मिलेगा, जिससे दोहरी फसल का रास्ता खुलेगा। ल विकास कार्यों में किसानों के विरोध और मुआवजे की कानूनी लड़ाइयों के बीच यह परियोजना अपवाद साबित हुई है। समाघात दल ने पाया कि न तो किसी ग्रामीण का पक्का-कच्चा मकान टूटेगा और न ही गांव की सार्वजनिक सुविधाओं पर कोई असर पड़ेगा।
किसानों की रजामंदी मिलने से परियोजना को लेकर प्रशासनिक राह आसान हो गई है।

