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Home»Country»लेह हिंसा: कड़ी सुरक्षा के बीच दो युवकों का अंतिम संस्कार; ‘पाकिस्तान से संबंध’ के आरोप खारिज
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लेह हिंसा: कड़ी सुरक्षा के बीच दो युवकों का अंतिम संस्कार; ‘पाकिस्तान से संबंध’ के आरोप खारिज

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniSeptember 28, 2025No Comments6 Mins Read
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लेह हिंसा: कड़ी सुरक्षा के बीच दो युवकों का अंतिम संस्कार; ‘पाकिस्तान से संबंध’ के आरोप खारिज
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लेह. लेह में बुधवार को हुई हिंसा में मारे गए चार युवकों में से दो का अंतिम संस्कार रविवार को कफ्र्यूग्रस्त शहर में कड़ी सुरक्षा के बीच किया गया और इस दौरान प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया, “स्थिति कुल मिलाकर सामान्य रही और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं मिली.” उन्होंने बताया कि शहर में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रविवार को भी निलंबित रहीं.

अधिकारियों के मुताबिक, लद्दाख में करगिल सहित अन्य प्रमुख हिस्सों में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर लागू प्रतिबंध रविवार को भी प्रभावी रहा. लेह हिंसा के सिलसिले में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिए जाने समेत पूरे मामले से निपटने के केंद्र के तरीके की आलोचना शुक्रवार को और तेज हो गई.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लद्दाख के लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर हमला कर रहे हैं. उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की वकालत भी की.
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर केंद्र के साथ बातचीत को आगे ब­ढ़ाने के लिए लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की ओर से बुधवार को आहूत बंद के दौरान लेह में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 90 अन्य घायल हो गए. हिंसा में कथित संलिप्तता को लेकर 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया.

प्राथमिकी में नामजद कांग्रेस के दो पार्षदों-स्मानला दोरजे नूरबो और फुटसोग स्टैनजिन त्सेपाक ने शनिवार को स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. लद्दाख बार एसोसिएशन, लेह के अध्यक्ष मोहम्मद शफी लासू ने बताया कि नूरबो और त्सेपाक के साथ लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के उपाध्यक्ष साविन रिगजिन और गांव के नंबरदार रिगजिन दोरजे को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

लासू के मुताबिक, पुलिस ने केवल इन चार लोगों की हिरासत की मांग की थी, जबकि लेह एपेक्स बॉडी और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के युवा नेताओं और छात्रों सहित बाकी लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अधिकारियों के अनुसार, लेह शहर में शनिवार को पहली बार चरणबद्ध तरीके से चार घंटे के लिए कफ्र्यू में ढील दी गई और इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं दर्ज की गई.

उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने केंद्र-शासित प्रदेश में स्थिति का जायजा लेने के लिए रविवार सुबह एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. अधिकारियों ने बताया कि हिंसा में मारे गए दो युवकों के अंतिम संस्कार को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती तौर पर कफ्र्यू में ढील नहीं देने का फैसला किया गया.
उन्होंने बताया कि दोनों युवकों का कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लद्दाखी परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया.

अधिकारियों के अनुसार, कफ्र्यूग्रस्त इलाकों में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान दंगा-रोधी वर्दी में तैनात देखे गए, जबकि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी दिन में फ्लैग मार्च करते नजर आए. लासू ने बताया कि बार एसोसिएशन ने हिंसा से जुड़े सभी मामलों को अपने हाथ में ले लिया है और कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपों का सामना कर रहे सभी गिरफ्तार व्यक्तियों की रिहाई की मांग कर रहा है.

उन्होंने कहा, “हमने सरकारी वकील का विरोध किया, जब उन्होंने चार लोगों की हिरासत की मांग की. अदालत ने चारों लोगों के वकीलों की मौजूदगी में उनसे पूछताछ किए जाने और हर आठ घंटे में उनकी अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराए जाने की हमारी याचिका स्वीकार कर ली.” लासू ने दावा किया कि दोनों कांग्रेस पार्षदों सहित सभी गिरफ्तार लोग निर्दोष हैं.

उन्होंने कहा, “त्सेपाक वह नकाबपोश व्यक्ति नहीं हैं, जिसे तस्वीरों या वीडियो क्लिप में उग्र प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए दिखाया गया है. वहीं, नूरबो अस्पताल में अपने निर्वाचन क्षेत्र के दो बुजुर्गों की देखभाल कर रहे थे, जो 23 सितंबर की शाम को भूख हड़ताल के दौरान गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे.” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लद्दाख के अद्भुत लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर हमला कर रहे हैं.” उन्होंने लिखा, “लद्दाख के लोगों ने आवाज उठाई. भाजपा ने चार युवकों की जान लेकर और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर जवाब दिया. हत्या बंद करो. हिंसा बंद करो. धमकी देना बंद करो.” राहुल ने कहा, “लद्दाख को आवाज दीजिए. उन्हें छठी अनुसूची में शामिल कीजिए.” वांगचुक फिलहाल राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. उन्हें अपने भाषणों के जरिये लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में शुक्रवार को रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था.

वांगचुक पर लेह में हिंसा भड़काने के आरोप को “बेबुनियाद” करार देते हुए उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने दावा किया कि वह “सबसे गांधीवादी तरीके” से विरोध कर रहे हैं और सीआरपीएफ की कार्रवाई के कारण 24 सितंबर को “स्थिति बिगड़ गई.” हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव र्लिनंग (एचआईएएल) की सह-संस्थापक गीतांजलि ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा कि वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद उनकी अपने पति से कोई बातचीत नहीं हो पाई है. उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता और उनके संस्थानों पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया.

लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जामवाल ने कहा है कि वांगचुक के पाकिस्तान के साथ कथित संबंधों की इस आधार पर जांच की जा रही है कि पिछले महीने गिरफ्तार एक पाकिस्तानी जासूस ने उनके प्रदर्शन के वीडियो सीमा पार भेजे थे.
डीजीपी ने वांगचुक के कुछ “संदिग्ध” विदेश दौरों का भी हवाला दिया, जिनमें ‘द डॉन’ अखबार के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए की गई पाकिस्तान की यात्रा भी शामिल है.

गीतांजलि ने अपने पति के पाकिस्तान से संबंध होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वांगचुक ने सभी विदेश यात्राएं प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के निमंत्रण पर की थीं. एक अन्य घटनाक्रम में, वैज्ञानिकों के एक समूह ने वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के कदम की निंदा करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की रविवार को मांग की. ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी (बीएसएस) ने केंद्र सरकार से लद्दाख के लोगों की गंभीर चिंताओं को दूर करने और इसके नाजुक पर्यावरण की रक्षा के लिए वांगचुक के साथ रचनात्मक बातचीत करने का आग्रह भी किया.

बीएसएस ने याद दिलाया कि वांगचुक ने मार्च 2024 में 21 दिनों का जलवायु उपवास किया था और जलवायु परिवर्तन के प्रति उच्च हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता की ओर ध्यान आर्किषत करने के लिए लेह से दिल्ली तक पैदल मार्च निकाला था.
बीएसएस ने एक बयान में कहा, “लगातार अहिंसक आंदोलनों का यह इतिहास शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में हुई हिंसक घटनाओं में अपनी कोई भी भूमिका होने से इनकार किया है.”

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