राष्ट्रवाणी: How To स्टोर Medicines Properly At Home: घर में दवाइयां रखना हर परिवार की जरूरत है, लेकिन सिर्फ दवा खरीदकर रख लेना ही काफी नहीं है. उन्हें किस जगह और किस तापमान पर रखा जा रहा है, इसका सीधा असर उनकी क्वालिटी, असर और शेल्फ लाइफ पर पड़ सकता है. खांसी की सिरप से लेकर रोजाना ली जाने वाली दवाइयों तक, हर मेडिसिन की स्टोरेज जरूरत एक जैसी नहीं होती. कुछ दवाओं को सामान्य कमरे के तापमान पर रखा जा सकता है, जबकि कुछ को ठंडे तापमान में रखना जरूरी होता है. खासकर सर्दियों में तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण दवाइयों की स्टोरेज को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. बहुत ज्यादा गर्मी, ठंड, नमी या सीधी धूप दवा की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है. इसलिए दवा के पैकेट पर लिखे स्टोरेज निर्देशों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दवाइयों को रखने के लिए ऐसी जगह चुनें जो ठंडी, सूखी और सीधी धूप से दूर हो. दवाइयों को बंद कैबिनेट या अलमारी में रखना बेहतर रहता है. साथ ही यह जगह बच्चों की पहुंच से दूर होनी चाहिए. अक्सर लोग दवाइयों को किचन या बाथरूम की अलमारी में रख देते हैं. लेकिन ये जगहें हमेशा सही नहीं होतीं. किचन में खाना पकाने से गर्मी और भाप बढ़ सकती है, जबकि बाथरूम में नमी ज्यादा रहती है. दोनों ही स्थितियां कुछ दवाओं की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं. घर में दवाइयों के लिए अलग बॉक्स या ऑर्गनाइजर रखना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसे बेडरूम की सूखी अलमारी में रखा जा सकता है. अगर घर में बच्चे हैं, तो लॉक होने वाला मेडिसिन कैबिनेट ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. कमरे के तापमान पर रखी जाने वाली दवाएं ज्यादातर टैबलेट और कैप्सूल को सामान्य कमरे के तापमान पर रखा जा सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कहीं भी रखा जा सकता है. इन्हें नमी, तेज रोशनी और बहुत ज्यादा गर्मी से बचाना जरूरी है. दवा की पैकेजिंग पर अक्सर स्टोरेज से जुड़ी जानकारी दी होती है, जैसे किसी खास तापमान से नीचे रखने की सलाह. इसलिए हर दवा के लिए एक ही नियम मानने के बजाय उसके पैकेट पर दिए निर्देशों को देखें. नमी से प्रभावित होने वाली दवाओं को सूखी जगह पर रखें. कुछ पाउडर या घुलने वाली टैबलेट नमी के संपर्क में आने पर अपनी क्वालिटी खो सकती हैं. अगर दवा को नमी से बचाने के लिए पैकेट में कोई कंट्रोल पैकेट दिया गया है, तो उसे बाहर न निकालें. किन दवाओं को फ्रिज में रखना होता है?
कुछ दवाओं को ठंडे तापमान में रखना जरूरी होता है. इनमें कुछ इंजेक्शन, कुछ आई ड्रॉप्स और कुछ जैविक दवाएं शामिल हो सकती हैं. हालांकि हर दवा को फ्रिज में रखना जरूरी नहीं है. अगर किसी दवा को फ्रिज में रखने के लिए कहा गया है, तो उसे फ्रिज के मुख्य हिस्से में रखें. उसे फ्रीजर में रखने की गलती न करें, क्योंकि जमने वाला तापमान कुछ दवाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. दवाओं को फ्रिज के दरवाजे में रखने से भी बचना चाहिए, क्योंकि वहां तापमान बार-बार बदल सकता है. इन्हें खाने-पीने की चीजों से अलग और साफ जगह पर रखना बेहतर है. दवा पर साफ लेबल लगा होने से गलती से किसी दूसरी चीज के साथ मिल जाने का खतरा भी कम होता है. सर्दियों में दवाओं को लेकर रहें सावधान सर्दियों में सिर्फ गर्मी से ही नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा ठंड से भी दवाओं को नुकसान हो सकता है. खासकर ठंडे इलाकों में दवाओं को खिड़की, बालकनी या ऐसी जगह रखने से बचें जहां तापमान बहुत नीचे जा सकता है. तरल दवाओं जैसे सिरप या कुछ दूसरी लिक्विड मेडिसिन में अगर रंग या बनावट बदलती दिखे, तो उन्हें इस्तेमाल करने से पहले फार्मासिस्ट से सलाह लें. दवाओं को जमने से बचाना जरूरी है. अगर किसी दवा को ठंडे तापमान में रखना जरूरी है लेकिन यात्रा के दौरान फ्रिज उपलब्ध नहीं है, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से उसके सुरक्षित स्टोरेज के बारे में पूछें. कुछ स्थितियों में इंसुलेटेड कोल्ड बॉक्स जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं. दवाओं को व्यवस्थित रखने का आसान तरीका घर में दवाइयों के लिए एक अलग बॉक्स बनाएं. उसमें रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाएं, फर्स्ट-एड की चीजें और दूसरी मेडिसिन व्यवस्थित तरीके से रखें. एक्सपायर हो चुकी दवाओं को इस्तेमाल की जा रही दवाओं से अलग रखना जरूरी है. मेडिसिन बॉक्स ऐसा हो जो आसानी से साफ किया जा सके, नमी से बचाए और उसमें दवाओं के पैकेट रखने की पर्याप्त जगह हो. बच्चों वाले घरों में इसे ऐसी जगह रखें जहां उनकी पहुंच न हो. किसी दवा का रंग, गंध या बनावट बदल गई है तो उसे बिना सलाह के इस्तेमाल न करें. टैबलेट का टूटना या आपस में चिपकना, सिरप का धुंधला होना, उसमें कण दिखाई देना या पैकेजिंग का फूलना ऐसे संकेत हो सकते हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए. दवा को लेकर जरा भी संदेह हो तो उसे इस्तेमाल करने से पहले फार्मासिस्ट से पूछें. दवा की एक्सपायरी डेट भी हमेशा जांचें. पुरानी या एक्सपायर दवाओं को खुले में फेंकना या नाली और टॉयलेट में बहाना सही तरीका नहीं है. इससे पर्यावरण और पालतू जानवरों को नुकसान हो सकता है. अगर स्थानीय स्तर पर दवा वापस लेने की सुविधा उपलब्ध हो, तो उसका इस्तेमाल करें. नहीं तो दवा के सुरक्षित निपटान के लिए फार्मासिस्ट या स्थानीय दिशा-निर्देशों की मदद लें. दवा की पैकेजिंग पर मौजूद अपनी निजी जानकारी को हटाना भी जरूरी है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
