राष्ट्रवाणी: Why Rock Salt Sendha Namak Lacks Iodine: रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि शरीर को जरूरी आयोडीन देने में भी अहम भूमिका निभाता है. आयोडीन की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, खासकर थायरॉइड से जुड़ी परेशानियां. यही वजह है कि नमक खरीदते समय सिर्फ उसका रंग, स्वाद या उसे कितना प्राकृतिक बताया जा रहा है, यह देखना काफी नहीं है. सबसे जरूरी बात यह है कि नमक आयोडाइज्ड है या नहीं. वर्ल्ड आयोडीन डेफिशिएंसी डे के मौके पर डॉ. तुषार टायल, एसोसिएट डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम ने बताया कि शरीर खुद आयोडीन नहीं बना सकता. इसलिए इसकी जरूरत खाने के जरिए पूरी करनी पड़ती है. ऐसे में रोजमर्रा की डाइट में आयोडाइज्ड नमक शामिल करना आयोडीन की कमी से बचने का आसान तरीका हो सकता है. आयोडीन बच्चों की ग्रोथ के साथ उनके दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास के लिए जरूरी है. थायरॉइड ग्लैंड आयोडीन की मदद से T4 और T3 हार्मोन बनाता है. ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म की रफ्तार को नियंत्रित करने, शरीर का तापमान बनाए रखने और शरीर के अलग-अलग अंगों को ठीक तरह से काम करने में मदद करते हैं. गर्भावस्था और बच्चे के शुरुआती वर्षों में इसकी जरूरत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में आयोडीन की कमी होने पर बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है. वहीं, लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर वयस्कों में अंडरएक्टिव थायरॉइड या गले के सामने की तरफ सूजन यानी घेंघा जैसी समस्या हो सकती है. आयोडाइज्ड टेबल सॉल्ट सबसे भरोसेमंद विकल्प अगर पिंक सॉल्ट, रॉक सॉल्ट और टेबल सॉल्ट की बात करें तो आयोडीन के लिहाज से नियमित टेबल सॉल्ट सबसे भरोसेमंद विकल्प है, लेकिन एक शर्त है- पैकेट पर साफ तौर पर ‘आयोडाइज्ड’ लिखा होना चाहिए. आयोडाइज्ड नमक में प्रोसेसिंग के दौरान नियंत्रित मात्रा में आयोडीन मिलाया जाता है. इसलिए रोजाना के खाने के जरिए शरीर को आयोडीन का अच्छा हिस्सा मिल सकता है. हालांकि, किसी व्यक्ति को वास्तव में कितना आयोडीन मिलेगा, यह नमक में मिलाई गई मात्रा, उसे किस तरह स्टोर किया गया है और खाना बनाते समय उसका इस्तेमाल कैसे किया गया है, इस पर निर्भर करता है. इसलिए नमक खरीदते समय पैकेट का लेबल देखना जरूरी है, क्योंकि हर टेबल सॉल्ट आयोडाइज्ड नहीं होता. खास बात यह है कि सिर्फ स्वाद से यह पता नहीं लगाया जा सकता कि नमक में आयोडीन है या नहीं. पिंक हिमालयन सॉल्ट दिखने में अलग, लेकिन आयोडीन के लिए नहीं पिंक हिमालयन सॉल्ट को अक्सर ज्यादा प्राकृतिक और शुद्ध विकल्प के तौर पर देखा जाता है. इसका गुलाबी रंग इसमें मौजूद कुछ ट्रेस मिनरल्स की वजह से होता है, आयोडीन की वजह से नहीं. अगर पैकेट पर इसे आयोडाइज्ड नहीं बताया गया है, तो इसमें मौजूद आयोडीन की मात्रा इतनी कम और असमान हो सकती है कि रोजाना की आयोडीन जरूरत पूरी करने के लिए इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, पिंक सॉल्ट को ज्यादा हेल्दी मानने की धारणा भी पूरी तरह सही नहीं है. इसमें मौजूद ट्रेस मिनरल्स बहुत कम मात्रा में होते हैं और यह भी मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही है. इसलिए यह दूसरे नमक की तरह ही शरीर में सोडियम बढ़ाता है. सेंधा नमक को आयोडीन का अच्छा सोर्स न समझें सेंधा नमक यानी रॉक सॉल्ट का इस्तेमाल व्रत के दौरान और कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है. यह आमतौर पर खदानों से निकाला जाता है और इसे सामान्य तौर पर आयोडाइज्ड नहीं किया जाता, जब तक निर्माता इसमें अलग से आयोडीन न मिलाए. इसमें मौजूद मिनरल्स की मात्रा उसके स्रोत के आधार पर बदल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें आयोडीन की उपयोगी मात्रा मौजूद होगी. अगर रोजाना के खाने में सामान्य आयोडाइज्ड नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाए, तो बिना पता चले आयोडीन का सेवन कम हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए यह बात महत्वपूर्ण है, जिनकी डाइट में आयोडीन वाले दूसरे खाद्य पदार्थ कम हैं. रोज कितना आयोडीन चाहिए और कैसे रखें नमक?
अधिकतर वयस्कों को रोज करीब 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इसकी जरूरत बढ़ जाती है. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वयस्कों को कुल नमक का सेवन रोजाना 5 ग्राम से कम रखना चाहिए. इसमें पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड में पहले से मौजूद नमक भी शामिल है. आयोडीन सिर्फ नमक से ही नहीं मिलता. दूध, दही, अंडे, सीफूड और कुछ फोर्टिफाइड फूड्स भी इसके स्रोत हो सकते हैं. हालांकि, इनमें आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है. खासकर जो लोग डेयरी और अंडे भी नहीं खाते, उन्हें अपनी डाइट में आयोडीन के स्रोतों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. आयोडाइज्ड नमक को ढक्कन वाले कंटेनर में ठंडी और सूखी जगह पर रखना चाहिए. खाना बनाते समय जहां संभव हो, इसे आखिर में डालना बेहतर है. लंबे समय तक पकाने से कुछ आयोडीन कम हो सकता है, हालांकि इसकी मात्रा खाना पकाने के तरीके पर निर्भर करती है. इसलिए नमक का रंग गुलाबी है, सफेद है या वह ज्यादा रिफाइंड है, इससे आयोडीन की उपलब्धता तय नहीं होती. सबसे जरूरी बात यह है कि नमक आयोडाइज्ड है या नहीं. आयोडाइज्ड नमक का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना आयोडीन की जरूरत पूरी करने का आसान तरीका है, साथ ही कुल नमक का सेवन भी तय सीमा में रखना जरूरी है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

