राष्ट्रवाणी: बिहार के सबसे मशहूर डांस में नचनिया डांस भी शामिल है। ये नृत्य काफी पुराना है और इसके शुरुआत की कहानी काफी मजेदार है। क्या है नचनिया डांस का इतिहास?
(एआई Generated Image) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में सिर्फ ऑर्केस्ट्रा डांस नहीं होता। यहां नचनिया डांस भी काफी मशहूर है, जिसे शादियों या किसी उत्सव के दौरान आयोजित किया जाता है।
ये नृत्य बिहार के दूसरे लोक नृत्यों से काफी अलग है और इसका इतिहास भी काफी पुराना है। नचनिया डांस शुरू होने की कहानी काफी दिलचस्प है, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। आइए जानें नचनिया डांस का इतिहास क्या है और आज समाज में इसे कैसे देखा जाता है।
नचनिया डांस का इतिहास बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़ा है। गांवों में शादियों या किसी उत्सव के दौरान इस नृत्य का आयोजन किया जाता है। हालांकि, माना जाता है कि इसकी शुरुआत मध्यकाल के बाद हुई थी और इसका मकसद लोगों का मनोरंजन करना था।
इसलिए लोगों के बीच ये काफी तेजी से मशहूर भी हुआ। उस समय मनोरंजन के लिए टीवी और इंटरनेट नहीं हुआ करते थे, ऐसे में लोग दिल बहलाने के लिए लोग कोठे आदि पर नृत्य देखा करते थे। हालांकि, बाई जी नाच काफी महंगा हुआ करता था।
इसलिए गरीब लोगों के मनोरंजन के लिए पुरुषों ने महिलाओं का भेष लेकर डांस करना शुरू किया, जिसे आज लौंडा नाच के नाम से जाना जाता है। नचनिया भी इसी नृत्य का एक रूप है। धीरे-धीरे नचनिया लोगों के बीच मशहूर होने लगा और इसी तरह ये यहां के उत्सवों का हिस्सा बन गया।
हालांकि, समय के साथ ऑर्केस्ट्रा में डांस करने वाली महिलाओं को भी नचनिया कहा जाने लगा, जिसका आयोजन समाज में अपनी आर्थिक स्थिति को दिखाने के लिए किया जाता है। नचनिया डांस का आयोजन लोगों के मनोरंजन के लिए होता है, लेकिन इसके जरिए कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज भी उठाई जाती है। भिखारी ठाकुर जैसे लोक कलाकारों ने इस नृत्य के जरिए समाज की बुराइयों को लोगों के सामने काफी दिलचस्प तरीके से पेश किया।
नचनिया डांस अकेले नहीं किया जाता। इसे हमेशा ग्रुप में किया जाता है, जिसमें हंसी, व्यंग्य और नृत्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया जाता है। लोकगीतों या फिल्मी गानों पर ये नृत्य किया जाता है और इसके बीच में डायलॉग्स भी बोले जाते हैं, जो दर्शकों को हंसाने के लिए बोले जाते हैं।
नचनिया नृत्य में सिर्फ डांस नहीं किया जाता, बल्कि अपने शरीर की भाव और मुद्राओं से दर्शकों का दिल जीतने की कोशिश की जाती है। पुरुष कलाकार महिलाओं की तरह सजते हैं, साड़ी पहनते हैं और उनके हाव-भाव और चाल की नकल करते हुए स्टेज पर आते हैं। इसके बाज तेज म्यूजिक पर जमकर डांस किया जाता है।
ढोलक, हरमोनियम और ढोल जैसे वाद्य यंत्रों पर नर्तक नृत्य करता है और लोगों का मनोरंजन करता है। समय के साथ गांव-देहात में आयोजित होने वाला नचनिया डांस में फूहड़ता और अश्लीलता दिखने लगी। अश्लील फिल्मी भोजपुरी गानों पर डांस किया जाता, जिसके कारण इस नृत्य को अश्लीलता से जोड़ा जाने लगा।
साथ ही, इस नृत्य में पुरुष महिलाओं का भेष लेकर डांस करते हैं। इसलिए भी इस नृत्य से जुड़े कलाकारों को समाज में काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। महिला डांसर्स, जो स्टेज पर परफॉर्म करती हैं, उनका भी अपमान करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे ही नचनिया शब्द अपमानजक बनता गया। आज किसी व्यक्ति का मजाक उड़ाने के लिए, किसी पुरुष कलाकार को नीचा दिखाने के लिए या महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाने के लिए नचनिया शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा है।

