राष्ट्रवाणी: रामानंद सागर की रामायण में शबरी का किरदार निभाने वाली सरिता देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया था। रामायण में सरिता देवी ने निभाया शबरी का रोल रामायण में शबरी का यादगार किरदार निभाया एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली।
रमानंद सागर (Ramanand Sagar) की रामायण (Ramayana) को टेलीविजन के इतिहास में सबसे सफल और पॉपुलर टीवी शोज में से एक माना जाता है। समय के साथ ये सिर्फ एक सीरियल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के इतिहास का हिस्सा बन गया। यही वजह है कि जब ये टीवी पर आता था तो सड़के और गलियां खाली हो जाया करती थीं।
समय के साथ लोगों का इसके प्रति प्रेम और बढ़ता गया। इसका एक नमूना हमें कोरोना काल के दौरान इसके रिपीट टेलीकास्ट में देखने को मिला। सीरियल के साथ-साथ इसके किरदारों को भी उतनी ही लाइमलाइट मिली।
राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, रावण इन सभी को तो आपने जान लिया। आज हम बात करेंगे रामायण की शबरी के बारे में जिसका किरदार सरिता देवी (Sarita Devi) ने निभाया था। सरिता देवी का किरदार भले ही छोटा था और वो कुछ समय के लिए दिखाई दीं लेकिन उन्होंने उस किरदार को जीवंत कर दिया।
सरिता देवा राजस्थान के जोधपुर की रहने वाली थीं। उन्होंने 1940 के दशक में अभिनय करना शुरू किया था, जब समाज में महिलाओं के लिए पर्दा-प्रथा लागू थी। उस समय इस कार्य को काफी गलत माना जाता था।
समाज की भारी आलोचना के बावजूद अपने पिता के साथ से सरिता ने इसे किया। उन्होंने साल 1947 में आई फिल्म ‘तोहफा’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी और 45 साल की उम्र तक 200 से अधिक फिल्मों में काम कर लिया। इनमें देव आनंद, दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकार शामिल हैं।
सरिता ने ‘देवदास’, ‘लव मैरिज’, ‘गंगा की सौगंध’, ‘पारख’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में सहायक भूमिका निभाई लेकिन सबसे अधिक पहचान रामायण की शबरी से मिली। बात उनके निजी जीवन की करें तो पर्दे पर सबको अध्यात्म और शांति का संदेश देने वाली सरिता देवी की वास्तविक जिंदगी दुखों और कठिनाइयों से भरी थी।
12 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद उनके पहले पति का निधन हो गया। बाद में उन्होंने एक ड्रामा कंपनी चलाने वाले से शादी कर ली। सरिता देवी पार्किंसंस नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं।
साल 2001 में 76 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।

