राष्ट्रवाणी: दीवाली पर उपहार देने का तरीका बदल गया है, अब लोग पारंपरिक वस्तुओं की जगह डिजिटल गिफ्ट कार्ड उपहार में दे रहे हैं। दीवाली पर लोग तोहफे और मिठाइयों की जगह दे रहे गिफ्ट कार्ड्स (Image Source: एआई Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में मनीष त्रिपाठी, नई दिल्ली।
सिल्क की साड़ी की जगह अपनी पसंद का स्टेकेशन मिले और रुपये के लिफाफे की जगह लग्जरी स्पा, सुनकर ही बांछें खिल जाती हैं। इस दीवाली अलादीन का यही चिराग बनकर बड़े पैमाने पर सामने आए हैं डिजिटल गिफ्ट कार्ड्स, जो दोनों पक्षों को दे रहे हैं दोहरी खुशी… दीवाली का त्योहार खुशियों के साथ-साथ थका देने वाली व्यस्तता भी लाता है।
हफ्तों पहले से शुरू होने वाली घर की सफाई, बाजारों के अनगिनत चक्कर और देर रात तक खरीदारी के कारण शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह थक जाते हैं। ऐसे में त्योहार के ठीक बाद उपयोग के लिए एक कस्टमाइज्ड स्पा कूपन किसी राहत से कम नहीं। तो क्या ताज्जुब कि इस साल अपनों के लिए दीवाली गिफ्ट लिस्ट में ‘लग्जरी स्पा और थेरेपी वाउचर्स’ काफी पसंद किए जा रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई तक फाइव स्टार होटलों और प्रतिष्ठित वेलनेस सेंटर्स में पोस्ट-दिवाली डिटाक्स पैकेजेस की बुकिंग में अभूतपूर्व उछाल आया है। लोग अब किसी शो-पीस या भारी-भरकम बर्तन के बजाय अपने परिवार और करीबियों को डीप टिश्यू मसाज, आयुर्वेदिक शिरोधारा या स्वीडिश थेरेपी के गिफ्ट कार्ड दे रहे हैं।
दरअसल इस दीवाली गिफ्टिंग ही नहीं, शापिंग, ट्रेवल, फैशन, फिटनेस, एंटरटेनमेंट-आप बस नाम लीजिए और इसे एक्सपीरिएंस करने के लिए गिफ्ट कार्ड/कूपन अथवा वाउचर हाजिर है। पारंपरिक रूप से दीवाली पर उपहार का मतलब भारी-भरकम डिब्बों, मिठाइयों और वस्तुओं का लेन-देन रहा है। मगर अब एक नई प्रवृत्ति स्पष्ट दिखती है।
त्योहार की इस गहमागहमी में अब लोग ऐसी चीजें चुन रहे हैं जो सामने वाले के जीवन में सकारात्मक और व्यावहारिक बदलाव ला सकें। उपहार में हर बार वही मिठाई का डिब्बा, सूखे मेवों की पोटली, डाइनिंग सेट या रुपये का लिफाफा देना हो गई है पुरानी बात। अब इन स्टीरियोटाइप उपहारों की जगह ले रहे हैं डिजिटल और फिजिकल गिफ्ट कार्ड/कूपन व वाउचर।
आधुनिक जीवनशैली में मुख्यतः डिजिटल टेक्नोलाजी गेम-चेंजर बनकर उभरी है। इस ट्रेंड में उपहार देने वाले को ज्यादा दिमागी मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ती और उपहार जिसे मिले, उसको मिलता है मन की चीज पाने का मौका। बस कूपन रिडीम करें और मन की शापिंग से लेकर लक्जरी अनुभव तक का बेहतरीन आनंद लें।
फेस्टिव गिफ्टिंग के इस बदलते संसार का सबसे आधुनिक रूप है ‘एक्सपीरियंस गिफ्टिंग’। वस्तुएं वक्त के साथ पुरानी पड़ जाती हैं या अलमारी के किसी कोने में धूल खाती हैं, मगर बेहतरीन अनुभव ताउम्र जेहन में जिंदा रहते हैं। तभी तो लोग अपने करीबियों को चमचमाते डिब्बे देने के बजाय लग्जरी स्पा सेशंस, वेलनेस रिट्रीट कूपन्स और गाइडेड मेडिटेशन क्लासेस के वाउचर गिफ्ट कर रहे हैं।
कई नामी फाइव स्टार होटल्स और स्पा सेंटर्स ने त्योहारों की थकान उतारने के लिए विशेष पैकेज लांच किए हैं, जिन्हें गिफ्ट कार्ड के रूप में हाथों-हाथ खरीदा जा रहा है। वेलनेस गिफ्टिंग के रूप में मानसिक स्वास्थ्य और माइंडफुलनेस से जुड़े लोकप्रिय मोबाइल एप्स के एनुअल डिजिटल सब्सक्रिप्शन भी गिफ्ट किए जा रहे हैं।
कारपोरेट घरानों में इसकी चमक और भी ज्यादा दिखती है, जहां शीर्ष अधिकारियों के लिए लग्जरी स्टेकेशन पैकेज से लेकर फिटनेस क्लासेज के एनुअल सब्सक्रिप्शन तक वरीयता में दिखते हैं। एक्सपीरियंस गिफ्टिंग का यह पूरा सिलसिला केवल किसी वस्तु को हाथ से आगे बढ़ा देने का लेन-देन नहीं है। इसका मनोवैज्ञानिक और सामाजिक असर बहुत गहरा होता है।
वेलनेस एक्सपर्ट मिकी मेहता के मुताबिक, ‘जब आप किसी को उसकी सेहत, नींद या मानसिक सुकून से जुड़ी कोई चीज भेंट करते हैं, तो दोनों पक्षों के बीच एक बेहद मजबूत भावनात्मक पुल का निर्माण होता है। उपहार देने वाले को एक खास आंतरिक संतुष्टि मिलती है, वहीं दूसरी ओर, उपहार पाने वाले व्यक्ति को यह गहरा अहसास होता है कि समाज, संस्थान और परिवार में उसकी सेहत की वास्तव में परवाह की जा रही है।
एक रूटीन शोपीस के मुकाबले स्वास्थ्य से जुड़ा यह तोहफा सीधे दिल पर असर करता है। यह रिश्तों को अधिक प्रगाढ़, भरोसेमंद और संवेदनशील बनाता है।’ भारत के कुल गिफ्टिंग बाजार में 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा कारपोरेट और बी2बी गिफ्टिंग का है, जिसका मूल्य करीब 25,000 से 28,000 करोड़ रुपये है। कारपोरेट इंडस्ट्री सालभर में जितनी गिफ्टिंग करती है, उसका 65प्रतिशत हिस्सा दीवाली के दौरान होता है।
डिजिटल गिफ्टिंग का ट्रेंड स्टार्टअप्स या नई कंपनियों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े कारपोरेट्स के लिए भी हजारों फिजिकल पैकेट्स को देश के अलग-अलग शहरों में कूरियर करने के मुकाबले डिजिटल वाउचर्स भेजना लाजिस्टिक रूप से बेहद आसान, तेज और किफायती साबित होता है।

