राष्ट्रवाणी (दुर्ग ब्यूरो): दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन, चीन के तिब्बती इलाके में 16,627 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको ट्रेन से सफर करना पसंद है?
खिड़की किनारे बैठकर बदलते नजारों को देखना अपने आप में एक अलग एहसास है। दुनिया भर में कई मशहूर रेलवे स्टेशन हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे स्टेशन के बारे में सुना है जो इतनी ऊंचाई पर हो कि वहां सांस लेना भी एक चुनौती बन जाए? हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन – तांगगुला की।
आइए जानते हैं क्या खास है इस स्टेशन में। यह स्टेशन किंगहाई-तिब्बत रेलवे रूट का हिस्सा है। लगभग 1,956 किलोमीटर लंबी यह लाइन चीन के किंगहाई प्रांत के गोलमुड शहर को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ती है।
यह लाइन तिब्बत को चीन के बाकी हिस्सों से सीधा जोड़ने वाली पहली रेल परियोजना है और इसे इंजीनियरिंग की दुनिया में एक बड़ा कारनामा माना जाता है। तांगगुला पहाड़ों के बीच बने इस स्टेशन को ‘डांगला’ रेलवे स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। इतनी ऊंचाई पर हवा बहुत पतली होती है और ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है।
यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत न हो, इसके लिए यहां से गुजरने वाली हर ट्रेन में एक खास सुविधा दी गई है। ट्रेन की हर सीट के ऊपर ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम लगा होता है, जिसका इस्तेमाल यात्री जरूरत पड़ने पर कर सकते हैं। बिना इस ऑक्सीजन सपोर्ट के, इस ऊंचे और दुर्गम रास्ते पर सफर करना बहुत मुश्किल है।
शायद सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुनिया का सबसे ऊंचा स्टेशन होने के बावजूद, यहां कोई भी यात्री न तो ट्रेन पर चढ़ सकता है और न ही उतर सकता है। दरअसल, 2010 से पहले यहां से पैसेंजर ट्रेनें गुजरती ही नहीं थीं। आज भी, इस स्टेशन का इस्तेमाल मुख्य रूप से तकनीकी जांच और रेलवे संचालन से जुड़े कामों के लिए किया जाता है।
यह स्टेशन बिना किसी परमानेंट स्टाफ के काम करता है। कोई भीड़भाड़ या शोरगुल न होने की वजह से यहां गजब की शांति रहती है। जब ट्रेन यहां से गुजरती है, तो मुसाफिरों को दूर-दूर तक फैले हरे मैदान और बर्फ से ढके पहाड़ों का ऐसा शांत और खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है, जो उनकी यादों में हमेशा के लिए बस जाता है।

