राष्ट्रवाणी: फटे-पुराने कपड़ों को कलात्मक रूप से मरम्मत करके महंगा बेचने का ‘विजिबल मेंडिंग ट्रेंड’ फैशन की दुनिया में छाया हुआ है। मार्केट में आया फटे-पुराने कपड़ों काविजिबल मेंडिंग ट्रेंड (Image Source: एआई Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
पहले के समय में फटे-पुराने कपड़ों को दरिद्रता की पहचान माना जाता था, पर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि वही फटे हुए कपड़े एक दिन फैशन का हिस्सा होंगे। सिर्फ फैशन का ही नहीं, बल्कि नए कपड़ों से भी महंगे बिकेंगे। इन दिनों बाजारों में मिल रहे पैबंद छेद वाले महंगे कपड़े इसी का सबसे बड़ा उदाहरण है।
बीते कुछ समय से फैशन की दुनिया में एक नया ट्रेंड देखने को मिला है, जिसमें लोग कपड़ों की मरम्मत कर उससे पैसे बचाने का नहीं, पैसे बनाने का तरीका खोज रहे हैं। इसे देखकर अब तो तो दुनिया की बड़ी फैशन कंपनियां भी होड़ में लग गई हैं पर ब्रिटेन की 27 साल की फॉरेस्ट रेंजर एलिस ब्राउन बड़ा चेहरा बनी हुई हैं।
बता दें कि वो कपड़ों की सैकेंड हैंड दुकानों से छेद वाले कपड़े लेकर उसे नीडल फेल्टिंग की मदद से सुंदर जानवर बनाकर भर देती हैं। उनके इस हुनर को लोगों ने इतना पसंद किया कि सोशल मीडिया पर एलिस की अच्छी फैन फालोइंग हो गई। एलिस ब्राउन की कपड़ों की मरम्मत वाली कला के बाद विजिबल मेंडिंग ट्रेंड में बना हुआ है।
इसका मतलब है एक ऐसी मरम्मत जिसमें कमी को छिपाया नहीं, बल्कि उसे आकर्षक बनाकर जानबूझकर दिखाया जाता है। कहा यह भी जा रहा हैं यह ट्रेंड इतना भी नहीं है, इसे शुरू हुए 6 साल हो चुके हैं। 80 के दशक में फैशन इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव हुआ और यूज एंड थ्रो वाले फैशन को लोग ज्यादा पसंद करने लगे।
नतीजतन फटे हुए कपड़ों को दोबारा सिलकर इस्तेमाल करने वाला मरम्मत का फैशन कहीं खो सा गया। पर आजकल इस विजिबल मेंडिंग ट्रेंड को लोग प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन और मजदूरों की खराब हालात के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने की भी नजर से देख रहे हैं। फटे-पुराने कपड़ों में फिर से नयापन लाने के लिए लोग जापान की पारंपरिक बोरो और साशिको तकनीक सीख रहे हैं, जिसमें धागे का रंग कपड़े से न मिलाकर उसे चटख या सफेद रंग के धागों से सिलकर डिजाइन बनती है।
इसके बाद कपड़े पहले से भी ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं और यही कीमत बढ़ने की भी वजह है।

