राष्ट्रवाणी: दीवाली पर पूर्वांचल में परंपरा है सूरन की सब्जी बनाने की। समृद्धि का प्रतीक माना जाने वाला यह कंद कैसे शामिल करें अपनी थाली में… Diwali Suran Tradition: दीवाली पर सूरन की सब्जी क्यों बनती है? (Image Source: एआई-Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में शेफ रविकांत पाठक, वाराणसी।
दीवाली केवल दीपों, रोशनी और मिठाइयों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी कृषि संस्कृति, मौसमी बदलावों और पीढ़ियों से चली आ रही पाक परंपराओं के उत्सव का भी नाम है। आज जब हम त्योहारों पर आधुनिक व्यंजनों और विदेशी स्वादों की ओर भाग रहे हैं, तब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की रसोइयों से उठने वाली सूरन की सब्जी की खुशबू हमें अपनी जड़ों की याद दिलाती है।
विशेषकर काशी और पूर्वांचल में दीवाली के पावन अवसर पर सूरन (जिमीकंद या ओल) की सब्जी और गर्मागर्म पूरियां बनाने का विशेष महत्व है। सूरन एक ऐसा कंद है जो पूरी तरह जमीन के भीतर फलता-फूलता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यह मिट्टी के भीतर लगातार बढ़ता रहता है।
इसी प्राकृतिक विशेषता के कारण लोकमान्यता में इसे निरंतर बढ़ने वाली समृद्धि और धन-धान्य का प्रतीक माना गया है। चूंकि दीवाली माता लक्ष्मी के आगमन और सुख-समृद्धि की कामना का महापर्व है, इसलिए इस दिन सूरन को थाली में शामिल करना शुभ माना जाता है। बचपन में अक्सर दादी-नानी बच्चों को प्यार से डराने के लिए कहती थीं कि ‘जो आज सूरन नहीं खाएगा, वह अगले जन्म में छछूंदर बनेगा।’ इस मीठी लोककथा का उद्देश्य नई पीढ़ी को इस पारंपरिक भोजन से जोड़ना था।
एक शेफ और न्यूट्रिशन के पैरोकार के रूप में, मैं सूरन को सुपरफूड मानता हूं। इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
सूरन में विटामिन बी6, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो त्वचा में चमक लाते हैं और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखते हैं। मगर दूसरी तरफ सूरन को पकाना एक समयसाध्य और जटिल काम है। इसकी तासीर गर्म और भारी होती है, जो दीवाली के समय शुरू होने वाली हल्की सर्दियों के लिए तो अनुकूल है, लेकिन रोजमर्रा के भोजन के लिए नहीं।
इसमें कैल्शियम आक्सलेट के महीन क्रिस्टल्स होते हैं, जिसके कारण कच्चे या अधपके सूरन से गले में खराश हो सकती है। इसलिए इसे सही तरीके से पकाना और इसमें खटास का सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए ठोस, कड़े और वजन में भारी देसी सूरन का ही चुनाव करें।
हाइब्रिड (मद्रासी) सूरन देखने में चिकना और साफ होता है, लेकिन असली सोंधापन देसी सूरन से ही आता है। हाथ में उठाने पर हल्का या दबाने पर पिलपिला महसूस होने वाला कंद अंदर से सूखा या सड़ा हो सकता है, इसे खरीदने से बचें। कटे हुए सूरन को लेते समय ध्यान दें कि उसका अंदरूनी हिस्सा हल्का गुलाबी या मटमैला सफेद हो, न कि गहरा काला या भूरा।
इसके अलावा, जिस कंद पर हरे रंग के अंकुर निकल रहे हों उसे बिल्कुल न लें, क्योंकि अंकुरण से इसका स्वाद और टेक्सचर प्रभावित होता है। सूरन (जिमीकंद): 500 ग्राम (छोटे टुकड़ों में कटा हुआ), सरसों का तेल: 4-5 बड़े चम्मच (तलने और ग्रेवी के लिए), खटास के लिए: 2 बड़े चम्मच नींबू का रस या 1 बड़ा चम्मच अमचूर पाउडर, खड़े मसाले: 1 तेजपत्ता, 1 छोटा चम्मच जीरा, 2 सूखी लाल मिर्च, 1 इंच दालचीनी, पिसे मसाले: 1 छोटा चम्मच हल्दी, 1.5 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला, पेस्ट: 2 मध्यम प्याज (बारीक कटे), 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 2 टमाटर की प्यूरी, नमक: स्वादानुसार, हरा धनिया: सजाने के लिए

