संयुक्त राष्ट्र. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने जून में इजराइल और अमेरिका के हमलों की बुधवार को आलोचना करते हुए कहा कि इससे “अंतरराष्ट्रीय विश्वास और क्षेत्र में शांति की संभावना को गहरा नुकसान पहुंचा है.” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की. इस साल जून में 12 दिनों तक इजराइल-ईरान युद्ध के बाद पहली बार है जब पेजेशकियन ने किसी वैश्विक मंच पर अपनी बात रखी है. इस युद्ध में ईरान के कई शीर्ष सैन्य और असैन्य नेताओं की हत्या कर दी गई थी.

अगर तेहरान शनिवार तक यूरोपीय देशों के साथ कोई समझौता नहीं करता है, तो उस पर संयुक्त राष्ट्र के कई कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं. हालांकि, न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले ही, पेजेशकियन और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची की कूटनीतिक कोशिशें उस समय धुंधली पड़ गईं जब देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी परमाणु वार्ता से इनकार कर दिया.
पेजेशकियन ने ईरान के इस दावे को भी दोहराया कि वह अपनी घरेलू परमाणु गतिविधियों के जरिए परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा. उन्होंने कहा, “मैं महासभा के समक्ष फिर से घोषणा करता हूं कि ईरान ने कभी भी परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं की और न ही करेगा.” पेजेशकियन ने ईरान पर 2015 के परमाणु समझौते की शर्तों का पालन करने में विफल रहने के कारण प्रतिबंधों को पुन? लागू करने के प्रयासों के लिए ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस की भी आलोचना की.

उन्होंने कहा कि ये देश-जिन्हें ई-तीन के रूप में जाना जाता है-वर्षों से “बुरी नीयत” से काम कर रहे हैं ताकि ईरान को उस समझौते का पालन करने के लिए मजबूर किया जा सके जिससे अमेरिका 2018 में बाहर निकल गया था. पेजेशकियन ने कहा, “उन्होंने खुद को समझौते के अच्छे पक्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया और उन्होंने ईरान के नेक प्रयासों को अपर्याप्त बताकर उनकी निंदा की.”

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