गुवाहाटी. असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबव्रत सैकिया ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर प्रसिद्ध गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग की मृत्यु की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने का आग्रह किया. गर्ग की पिछले सप्ताह सिंगापुर में समुद्र में डूबने से मृत्यु हो गई थी.
असम जातीय परिषद (एजेपी) और राइजोर दल (आरडी) जैसे अन्य विपक्षी दलों ने भी जुबिन गर्ग की मौत की जांच सीबीआई द्वारा कराए जाने की मांग की है. साथ ही एक व्यक्ति ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर अदालत की निगरानी में जांच की अपील की है. सैकिया ने अपने पत्र में कहा कि असम आपराध जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में मदद के लिए उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के नेतृत्व में सीबीआई जांच कराई जाए.
उन्होंने लिखा, “मैं सिंगापुर में 19 सितंबर को असम के प्रसिद्ध गायक और संगीत कलाकार जुबिन गर्ग की मौत के संदिग्ध हालात को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए यह पत्र लिख रहा हूं और इस मामले में तत्काल अतिरिक्त जांच सहयोग की आवश्यकता पर बल दे रहा हूं क्योंकि क्षेत्रीय सीमाओं के कारण जांच में बाधा आ रही है और साजिश के पर्याप्त संकेत मौजूद हैं.” सैकिया ने कहा, “हालांकि असम सरकार ने सीआईडी जांच शुरू की है और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है लेकिन चूंकि मौत सिंगापुर में हुई है इसलिए यह मामला राज्य पुलिस के लिए एक असाधारण चुनौती पेश करता है, जिसे वह पूरी तरह नहीं सुलझा सकती.” सैकिया ने आरोप लगाया कि शुरुआती साक्ष्य बताते हैं कि गर्ग की मृत्यु में किसी प्रकार की जबरदस्ती शामिल हो सकती है. प्रस्थान से पहले गर्ग ने अपने करीबी साथियों से कहा था कि वह स्वेच्छा से यात्रा नहीं कर रहे हैं बल्कि भारी दबाव में जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “उन्हें खास तौर पर सीमित साथियों के साथ सिंगापुर भेजा गया, जो उनकी सामान्य यात्रा शैली से अलग था. इससे यह सुनिश्चित किया गया कि घटना के समय गवाहों की संख्या न्यूनतम हो, उनके सुरक्षा दल की निगरानी न हो, संभावित मददगारों से दूरी बनी रहे और आयोजकों की जवाबदेही भी कम हो.” सैकिया ने यह भी कहा कि ‘नॉर्थईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत के बयान आपस में विरोधाभासी हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि या तो जानबूझकर गुमराह किया गया है या फिर गंभीर लापरवाही हुई है.
बुधवार को ही असम सरकार ने श्यामकानु महंत पर राज्य में कोई भी कार्यक्रम या आयोजन करने पर रोक लगा दी. महंत असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंत के छोटे भाई हैं, जो फिलहाल असम राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर हैं. उनके एक अन्य बड़े भाई ननी गोपाल महंत मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार रह चुके हैं और बाद में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति बने. सैकिया ने कहा, “यह मामला सिर्फ एक दुखद मौत नहीं बल्कि एक मजबूत और निर्भीक आवाज की संभावित सुनियोजित हत्या को दर्शाता है. मामला जांच में उच्चतम स्तर की पारर्दिशता और निगरानी की मांग करता है.”
जुबिन की मौत के मामले में न्यूज. चैनल मालिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन
गायक जुबिन गर्ग के सैकड़ों प्रशंसकों ने बुधवार को एक निजी टीवी चैनल के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया और चैनल के मालिक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. चैनल के मालिक पूर्वोत्तर भारत महोत्सव में भाग लेने के लिए सिंगापुर गए थे. ‘प्राग न्यूज’ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजीव नारायण गर्ग पिछले सप्ताह जुबिन की हुई मौत की पूरी घटना में अपनी भूमिका नहीं होने को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे और तभी यह विरोध प्रदर्शन हुआ.
जुबिन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय निधन हो गया जहां वह पूर्वोत्तर भारत महोत्सव में भाग लेने गए थे. लोकप्रिय गायक का मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ गुवाहाटी के बाहरी इलाके में अंतिम संस्कार किया गया. इस घटना में नारायण की कथित भूमिका के लिए उनके खिलाफ बोंगाईगांव थाने में पहले ही एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है. इसे आगे की जांच के लिए अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ??मुख्यालय भेज दिया गया है. नारायण ने दावा किया कि वह उस निजी नौका पर मौजूद नहीं थे और वह गर्ग को बंदरगाह से अस्पताल ले गए थे. इस नौका में कुछ असमिया अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के साथ गायक सिंगापुर के एक द्वीप पर गए थे.
उन्होंने कहा, ”मुझे नौका यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. मैं दोपहर का भोजन कर रहा था तभी श्यामकानु महंत का फ.ोन आया कि जुबिन के साथ घटना घटी है. मैं तुरंत बंदरगाह पहुंचा और उन्हें अस्पताल ले गया.” महंत इस महोत्सव के मुख्य आयोजक थे और महोत्सव को त्रासदी के बाद रद्द कर दिया गया था. नारायण द्वारा राज्य की राजधानी के उलुबारी स्थित अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता किए जाने के दौरान गर्ग के सैकड़ों प्रशंसक बाहर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे.
यहां एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ”वह एक आपराधिक मामले में आरोपी हैं और वह प्रेस वार्ता कैसे कर सकते हैं? पुलिस ने उन्हें एक बार भी हिरासत में क्यों नहीं लिया या उनसे पूछताछ क्यों नहीं की? हम इस मामले में कोई नरमी बर्दाश्त नहीं करेंगे. यह जुबिन दा का मामला है.”
