इस्लामाबाद. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बृहस्पतिवार को पहलगाम आतंकवादी हमले को ”दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध की स्थिति ”बहुत खतरनाक मोड़” ले सकती थी. भारत ने छह मई की देर रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ढांचे नष्ट कर दिए थे. भारत की कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. भारतीय सेना ने इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई की थी. दोनों पक्ष के बीच चार दिनों के संघर्ष के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी.
शहबाज ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ”पहलगाम की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति किसी भी समय बहुत खतरनाक मोड़ ले सकती थी.” इस कार्यक्रम में उन्होंने सैन्य संघर्ष के दौरान मारे गए नागरिकों के परिजनों और घायलों को मुआवजे के चेक वितरित किए. शहबाज ने दावा किया कि पाकिस्तान ने हमले की निष्पक्ष जांच की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
उन्होंने कहा, ”पाकिस्तान पहलगाम घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार था, लेकिन इस पर सहमत होने के बजाय भारत ने पाकिस्तान पर हमला कर दिया, जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया गया.” शहबाज ने दावा किया कि पाकिस्तान ने 1971 के युद्ध की हार का बदला ले लिया है.
भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के परिणामस्वरूप पाकिस्तान का विभाजन हुआ और बांग्लादेश के रूप में नया देश बना, जिसे पहले पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था. प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने केवल सैन्य प्रतिष्ठानों को ही निशाना बनाया.
पाकिस्तान और भारत के बीच संघर्ष विराम समझौता कायम है: विदेश मंत्री डार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशहाक डार ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौता कायम है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के माध्यम से सैन्य स्तर पर बातचीत सुचारू रूप से हो रही है. चीन से लौटने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डार ने कहा, ”संघर्ष विराम कायम है और इसे निलंबित नहीं किया गया है या यह अस्थायी व्यवस्था नहीं है.” सरकारी ‘रेडियो पाकिस्तान’ की खबर के अनुसार, उपप्रधानमंत्री डार ने कहा कि डीजीएमओ के माध्यम से सैन्य स्तर की बातचीत सुचारू रूप से आगे बढ. रही है.
भारत ने छह मई की देर रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ढांचों को नष्ट कर दिया. भारत की कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया. भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर भीषण जवाबी हमला किया. चार दिनों के टकराव के बाद 10 मई को दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी.
भारतीय सेना ने रविवार को कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच बनी सहमति की ”कोई समाप्ति तिथि” नहीं है. ‘रेडियो पाकिस्तान’ की खबर के अनुसार, डार ने दावा किया कि पाकिस्तान ने पहलगाम घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच की पेशकश की, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया.
डार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयान को ”दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक” करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है. उन्होंने कहा, ”हालांकि, जब भी चुनौती दी जाएगी, हम पूरी ताकत से अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे.” उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने ”अधिकतम संयम” दिखाया है और वह उकसावे का कोई कदम नहीं उठा रहा है.
एक सवाल के जवाब में डार ने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच वार्ता का स्थान आम सहमति से तय किया जाएगा.
चीन की अपनी तीन-दिवसीय यात्रा पर, डार ने कहा कि उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग की विशेष यात्रा की. उन्होंने इस यात्रा को ”बेहद सार्थक” बताया.
उन्होंने कहा, ”मैंने मंगलवार को चीनी प्रतिनिधिमंडलों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं. मैंने बुधवार को पाकिस्तान, चीन और अफग़ानिस्तान के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक में भाग लिया. त्रिपक्षीय बैठक में हमने अफग़ान शरणार्थियों, क्षेत्रीय स्थिति और व्यापार पर चर्चा की.” उन्होंने कहा कि बीजिंग में हुई वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक मोर्चों पर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है.
कोई भी पाकिस्तान को बल प्रयोग या उसकी धमकी के जरिये मजबूर नहीं कर सकता: पाकिस्तानी जनरल
पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य कमांडर ने भारत के साथ हालिया संघर्ष के बाद अपनी पहली औपचारिक बैठक में बृहस्पतिवार को कहा कि उनके देश को बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी के जरिये मजबूर नहीं किया जा सकता. पाकिस्तान सेना ने एक बयान में कहा कि इन विभिन्न सैन्य जनरल ने जनरल मुख्यालय में फील्ड मार्शल असीम मुनीर की अध्यक्षता में आयोजित 270वें कोर कमांडर सम्मेलन के दौरान मौजूदा आंतरिक और बा’ सुरक्षा माहौल की समीक्षा भी की.
बयान में कहा गया है, ”कोई भी पाकिस्तान को बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी देकर मजबूर नहीं कर सकता. राष्ट्र अपने महत्वपूर्ण हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा.” यह बैठक भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच चार दिनों की तीव्र संघर्ष के बाद सैन्य कार्रवाइयों को रोकने की दोनों पक्षों के बीच एक सहमति बनने के लगभग डेढ. सप्ताह बाद आयोजित हुई.
भारतीय सेना का कहना है कि भारतीय सैन्य ठिकानों को लक्षित करने के पाकिस्तान के प्रयासों के जवाब में भारत द्वारा आठ पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के बाद पाकिस्तान ने 10 मई को सैन्य कार्रवाइयां रोकने का अनुरोध किया था.
पाकिस्तान सेना ने बयान में कहा, ”पाकिस्तान ने रणनीतिक संयम और संचालनात्मक स्पष्टता के साथ जवाब दिया, जिससे न केवल प्रतिरोध क्षमता बल्कि नैतिक अधिकार भी बरकरार रहा.” बयान के अनुसार बैठक में “किसी भी आक्रामक या दुस्साहसपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के पाकिस्तान के अडिग संकल्प” को दोहराया गया.
इस बैठक में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय आतंकवादियों से उत्पन्न खतरे पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया. बयान में कहा गया कि संकल्प लिया गया कि पाकिस्तान कभी भी बाहरी प्रायोजित आतंकवाद के कारण अपनी शांति से समझौता नहीं होने देगा. बयान में कहा गया है कि इन कमांडर ने ”दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा को और बिगड़ने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय ध्यान और हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया, साथ ही कश्मीरियों के लिए पूर्ण राजनयिक, राजनीतिक, नैतिक और मानवीय समर्थन दोहराया.”
