भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए बिहार सरकार ने सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। बीते शुक्रवार को बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें राज्य भर में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा की गई। बैठक में सिविल डिफेंस निदेशालय के महानिदेशक परेश सक्सेना भी उपस्थित रहे।इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किसी आपात स्थिति के दौरान सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाना था। अधिकारियों ने बैठक में कहा कि सीमावर्ती जिलों जैसे पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज में सिविल डिफेंस वालंटियर्स की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा पहले से चिन्हित जिलों- पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, पटना, गया और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर में भी व्यवस्था सशक्त की जाएगी।

सिविल डिफेंस वालंटियर्स को त्वरित राहत, बचाव कार्य, जनजागरूकता और सामुदायिक क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से होगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नेशनल सर्विस स्कीम (NSS), नेशनल कैडेट कोर (NCC), नेहरू युवा केंद्र, और स्काउट-गाइड जैसी संस्थाओं से युवाओं को “आपदा मित्र” कार्यक्रम के तहत जोड़ा जाएगा। वालंटियर्स के बढ़ते कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए उनका दैनिक मानदेय 400 रुपये से बढ़ाकर 750 रुपये करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। राज्य भर में जो युवा नागरिक सुरक्षा में स्वयंसेवक के रूप में जुड़ना चाहते हैं, वे अपने जिले के सिविल डिफेंस कार्यालय या जिलाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

इस बैठक में संयुक्त सचिव नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, विशेष पदाधिकारी संदीप कुमार और अविनाश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और युवा व रक्षा संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाक तनाव बनाहुआ है। इसके जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई की सुबह पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया था।

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