राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): सतीश पांडेय, प्रतिनिधि, रायपुर : सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली की दरों को लेकर नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अनुसार, शाम सात बजे से रात 12 बजे तक ग्रिड में दी जाने वाली बिजली के लिए आठ रुपये प्रति यूनिट की दर प्रस्तावित की गई है।
वहीं, एक अप्रैल 2027 या उसके बाद चालू होने वाली पांच मेगावाट से अधिक क्षमता की नई ग्रिड से जुड़ी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में कम से कम दो घंटे की क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) लगाना अनिवार्य होगा। विद्युत विनियामक आयोग ने इन बदलावों पर हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए तीसरे संशोधन का प्रारूप जारी किया है।
प्रस्ताव के अनुसार, पांच मेगावाट से अधिक क्षमता की नई परियोजनाओं में कम से कम पांच प्रतिशत क्षमता का बैटरी स्टोरेज रखना होगा। अनुबंधित मांग के 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता वाले कैप्टिव संयंत्रों को अतिरिक्त क्षमता के 20 प्रतिशत के बराबर बैटरी स्टोरेज स्थापित करना होगा। इसका उद्देश्य जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता को बेहतर बनाना है।
एक अप्रैल 2027 के बाद चालू होने वाली पांच मेगावाट से अधिक क्षमता की नई परियोजनाओं को शुरुआती सात वर्षों तक पारेषण, व्हीलिंग, क्रास सब्सिडी अधिभार और एसएलडीसी शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है। इससे ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली लेने वाले नेट मीटर वाले उपभोक्ताओं और परियोजना संचालकों को लाभ मिल सकता है।
सेटलमेंट अवधि के अंत में बची अधिशेष बिजली की खरीद दर 1.94 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित की गई है। बैंकिंग चक्र मासिक होगा और बैंकिंग शुल्क के रूप में आठ प्रतिशत बिजली देनी होगी। पीक समय यानी शाम पांच बजे से रात 11 बजे तक बिजली निकासी पर 30 प्रतिशत शुल्क, सामान्य समय में 10 प्रतिशत और सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक शून्य शुल्क प्रस्तावित है।
पांच किलोवाट तक की परियोजनाओं के लिए वितरण ट्रांसफार्मर सहित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की लागत वितरण कंपनी की राजस्व आवश्यकता में शामिल की जाएगी। एक एमवीए तक की अनुबंधित मांग वाले उपभोक्ताओं को टेलीमेट्री और आरटीयू की अनिवार्यता से छूट देने का भी प्रस्ताव है।

