नयी दिल्ली. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात ने कहा कि भाजपा सरकार के ‘नव-फासीवादी के लक्षणों’ पर टिप्पणी पार्टी के मसौदा प्रस्ताव में जोड़ी गई थी, ताकि कार्यकर्ताओं को ”नव-फासीवाद” शब्द के बारे में समझाया जा सके.
उन्होंने कहा कि इसका प्रयोग पहली बार किसी पार्टी दस्तावेज में किया जा रहा है.

करात ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में कहा कि दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पार्टी अभी तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है कि नरेन्द्र मोदी के अधीन भारत राज्य ‘फासीवादी या नव-फासीवादी’ है. उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि यदि ‘नव-फासीवादी लक्षणों’ पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह एक ”पूर्ण नव-फासीवादी राज्य या सरकार” के रूप में विकसित हो सकता है.

माकपा ने आगामी पार्टी समागम के लिए राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे पर अपनी राज्य इकाइयों को पिछले महीने एक पत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि पार्टी मोदी सरकार या भारत राज्य को ‘नव-फासीवादी’ नहीं मानती है, भले ही इसमें ‘नव-फासीवादी लक्षणों’ की अभिव्यक्तियां हों. इस पत्र पर कांग्रेस की केरल इकाई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और माकपा पर भाजपा के प्रति नरम रुख अपनाने तथा संघ परिवार की ‘नजर में अच्छा’ बनने की कोशिश करने का आरोप लगाया था.

पत्र जारी करने की आवश्यकता को सही ठहराते हुए करात ने कहा कि केन्द्रीय समिति को लगा कि उसे पार्टी सदस्यों के लाभ के लिए ‘नव-फासीवाद’ शब्द की व्याख्या करनी चाहिए, जो अगले महीने मदुरै में पार्टी समागम में पेश प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. करात ने स्वीकार किया कि माकपा का पतन पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में समर्थन में कमी के कारण हुआ है. उन्होंने कहा कि पार्टी की खोई जमीन फिर से हासिल करने के लिए आगामी अखिल भारतीय सम्मेलन में कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी. वर्ष 2005 से 2015 तक माकपा के महासचिव रहे करात ने कहा कि वह वरिष्ठ नेता ज्योति बसु द्वारा 1996 में प्रधानमंत्री पद से इनकार करने को पार्टी के पतन का कारण नहीं मानते.

करात ने कहा, ”यह सच है कि पार्टी की स्वतंत्र ताकत और प्रभाव में वृद्धि नहीं हुई है… और इसका मुख्य कारण पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में हमारा समर्थन आधार कमजोर होना है, जो हमारे दो मजबूत राज्य हैं.” माकपा के अंतरिम समन्वयक ने कहा, ”अत? पार्टी सम्मेलन में हमारा ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि हम पार्टी को कैसे मजबूत करें.” पार्टी सम्मेलन में चर्चा के सदंर्भ में उन्होंने कहा, ”यह ध्यान में रखते हुए… हमारा राजनीतिक कार्य या लक्ष्य अभी भी यही है कि भाजपा या मोदी सरकार को कैसे हराया जाए, इसके लिए व्यापक एकता की आवश्यकता है. हम इसे पहचानते हैं. इस व्यापक एकता, एक व्यापक मंच को कैसे बनाए रखा जाए, इसके लिए हमें प्रयास करना होगा.”

करात ने कहा, ”साथ ही, हम इसे अलग से नहीं देखते हैं. माकपा को मजबूत करने से समग्र विपक्षी एकता या वामपंथ को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी. हमें लगता है कि वामपंथ की वैकल्पिक राजनीति या नीतियों को मोदी सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ लड़ाई के लिए एक केंद्र बिंदु के रूप में पेश किया जाना चाहिए.”

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