राष्ट्रवाणी: Mattress Sagging In The Middle Quick Fix Hacks: घर का गद्दा अगर पहले की तरह आरामदायक महसूस नहीं हो रहा है या जिस जगह आप रोज सोते हैं, वहां धीरे-धीरे गड्ढा बनने लगा है, तो इसे नजरअंदाज न करें. कई बार सुबह उठने के बाद थकान महसूस होना या गद्दे पर लेटने में पहले जैसा आराम न मिलना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि गद्दा अपनी शेप और सपोर्ट खो रहा है. लगातार इस्तेमाल और समय के साथ गद्दे का इस तरह दबना आम समस्या है. गद्दे के किनारे बैठते ही अगर वह नीचे की तरफ दबने लगे तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि गद्दे को मिलने वाला सपोर्ट कम हो गया है. लंबे समय तक इसी तरह इस्तेमाल करने से गद्दे की स्थिति और खराब हो सकती है. हालांकि, हर बार गद्दा बदलना जरूरी नहीं होता. कुछ आसान तरीकों से उसके इस्तेमाल की अवधि बढ़ाने और दबने की समस्या को कम करने की कोशिश की जा सकती है. गद्दे को एक ही जगह से लगातार इस्तेमाल करने पर शरीर का वजन बार-बार उसी हिस्से पर पड़ता है. इससे गद्दे के एक हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है. ऐसे में गद्दे को नियमित रूप से 180 डिग्री घुमाना एक आसान तरीका है. ध्यान रखें कि हर गद्दे को पलटना जरूरी नहीं होता. अगर गद्दा डबल साइड इस्तेमाल करने के लिए नहीं बना है तो उसे पलटने की कोशिश न करें. इसके बजाय उसे घुमा दें, ताकि जिस हिस्से पर लगातार वजन पड़ रहा था, उस पर दबाव कम हो सके और गद्दे के दूसरे हिस्से का इस्तेमाल हो. अगर गद्दा बीच से ज्यादा दब रहा है तो गद्दे और बेड फ्रेम या बॉक्स स्प्रिंग के बीच करीब 1 इंच मोटा लकड़ी का बोर्ड भी लगाया जा सकता है. इससे गद्दे को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है. अगर गद्दे की सतह पर कुछ जगह नीचे दब गई है तो मैट्रेस टॉपर भी काम आ सकता है. नया गद्दा खरीदने की तुलना में यह एक कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है. टॉपर गद्दे की असमान सतह को कुछ हद तक बराबर करने में मदद करता है, जिससे सोते समय बने दबाव वाले हिस्से कम महसूस हो सकते हैं. इसके लिए करीब 2 से 5 इंच मोटा टॉपर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें मेमोरी फोम, लेटेक्स या श्रेडेड मेमोरी फोम जैसे विकल्प मिलते हैं. टॉपर चुनते समय उसकी मोटाई का ध्यान रखें, क्योंकि बहुत ज्यादा मोटा टॉपर भी सोते समय शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. कई बार समस्या सिर्फ गद्दे में नहीं होती, बल्कि उसे नीचे से मिलने वाले सपोर्ट में भी हो सकती है. अगर बेड का फाउंडेशन पर्याप्त मजबूत नहीं है तो गद्दा जल्दी दब सकता है. पुराने फाउंडेशन और स्लैट वाले बेड में भी समय के साथ समस्या आ सकती है. लगातार इस्तेमाल के कारण लकड़ी के स्लैट मुड़ सकते हैं और गद्दे को एक समान सपोर्ट नहीं मिल पाता. ऐसे में बेड के फाउंडेशन को अच्छी तरह चेक करें. गद्दे को मजबूत सपोर्ट देने के लिए मजबूत लकड़ी या मेटल स्ट्रक्चर वाला फाउंडेशन इस्तेमाल किया जा सकता है. फाउंडेशन के पैरों की संख्या और उसकी मजबूती भी देखना जरूरी है. अगर गद्दे का कोई हिस्सा ज्यादा दब गया है तो वहां तकिए रखकर कुछ समय के लिए अतिरिक्त सपोर्ट लिया जा सकता है. इससे दबे हुए हिस्से में सपोर्ट मिल सकता है और सोते समय थोड़ी सुविधा महसूस हो सकती है. हालांकि, यह स्थायी समाधान नहीं है. ज्यादा तकिए रखने से गद्दे की सतह असमान हो सकती है और इससे गद्दे के दूसरे हिस्सों पर भी दबाव पड़ सकता है. इसलिए इस तरीके को सिर्फ अस्थायी उपाय के तौर पर ही इस्तेमाल करना बेहतर है. अगर गद्दा ज्यादा पुराना नहीं है और उसमें दबने की समस्या दिखाई दे रही है तो उसकी वारंटी जरूर चेक करें. कई बार गद्दे की वारंटी में कुछ खास तरह की समस्याओं के लिए रिपेयर या रिप्लेसमेंट का विकल्प दिया जाता है. इसलिए गद्दा बदलने का फैसला लेने से पहले उसके वारंटी नियमों को देख लें. अगर गद्दे की समस्या वारंटी के दायरे में आती है तो कंपनी से संपर्क करके आगे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है. अगर इन तरीकों को आजमाने के बाद भी गद्दा लगातार दबता जा रहा है और उस पर सोने में पहले जैसा आराम नहीं मिल रहा है, तो नया गद्दा लेने पर विचार किया जा सकता है. खासकर जब गद्दे की सतह काफी असमान हो गई हो या वह शरीर को पहले जैसा सपोर्ट नहीं दे रहा हो. सोनम एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. यहां वह लाइफस्टाइल कैटिगरी और इसके अंतर्गत आने वाली सब-कैटिगरीज हेल्थ, होम टिप्स, रिलेशनशिप, ट्रैवल, पैरेंटिंग, ब्यूटी और फैशन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. सोनम करीब 15 साल से लेखन की दुनिया में कार्यरत हैं. इससे पहले वह , के आईनेक्स्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. सोनम ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन किया है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
Trending
- कैसे बनता होता है जंगली शहद? छतरपुर के वैद्यनाथ करते है तैयार, क्वालिटी ने नंबर 1 – राष्ट्रवाणी
- गुलाब जामुन और काला जामुन में क्या है अंतर? रंग, स्वाद और बनावट से समझें फर्क – राष्ट्रवाणी
- तोते जैसी चोंच और पंखों वाला ‘हेल चिकन’, मिला 6.6 करोड़ साल पुराना डायनासोर – राष्ट्रवाणी
- सेमीफाइनल का टिकट पक्का, पर मलेशिया के खिलाफ होगा भारत का असली इम्तिहान—जानें पूरा मामला – राष्ट्रवाणी
- अपनी पत्नी को ही दे दी चुनौती… बेलारूस के विपक्ष में आखिर किस बात की रार? – राष्ट्रवाणी
- लव प्रपोजल ठुकारने पर 10वीं की छात्रा पर चेनसॉ से हमला, सहेली की भी हालत नाजुक – राष्ट्रवाणी
- बिजनेस शुरू करने के लिए एक फूटी कौड़ी नहीं? इस योजना में करें अप्लाई, तुरंत मिलेगा पैसा – राष्ट्रवाणी
- ‘वो इंसानों के लिए नहीं था’, 2 मिनट की मौत के बाद लौटा शख्स, दूसरी दुनिया से ले आया अभिशाप – राष्ट्रवाणी
