बेंगलुरु. कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार फीसदी आरक्षण देने के प्रावधान वाले विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा है. राजभवन के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि गहलोत ने विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित कर दिया और इसे कर्नाटक के विधि एवं संसदीय कार्य विभाग के पास भेज दिया. उन्होंने बताया कि अब राज्य सरकार इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए उनके पास भेजेगी.

गहलोत ने राज्य सरकार को भेजे एक पत्र में कहा, ह्लभारत का संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है, क्योंकि यह समानता (अनुच्छेद 14), भेदभाव विरोधी (अनुच्छेद 15) और सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर (अनुच्छेद 16) के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.ह्व उन्होंने लिखा, ह्लउच्चतम न्यायालय ने अपने विभिन्न फैसलों में लगातार कहा है कि कि सकारात्मक कार्रवाई हमेशा सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होनी चाहिए, न कि धार्मिक पहचान पर.ह्व राज्यपाल ने पत्र में इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है.

उन्होंने लिखा, ह्लअनुच्छेद 200 और 201 से स्पष्ट है कि राज्य विधानसभा की ओर से पारित विधेयक तभी कानून बन सकता है, जब राज्यपाल उसे मंजूरी दे दें या फिर अगर राज्यपाल द्वारा उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया हो और राष्ट्रपति उस पर अपनी स्वीकृति दे दें.ह्व गहलोत ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि जो यह व्यवस्था करता है कि राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत कोई विधेयक, अधिनियम के रूप में तब प्रभावी नहीं होगा, जब राज्यपाल के लिए इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रखने की कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि यह राज्यपाल पर निर्भर है कि वे अपने विवेक का प्रयोग करें और निर्णय लें कि उन्हें विधेयक को मंजूरी देनी चाहिए या भविष्य में किसी जटिलता से बचने के लिए इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखना चाहिए. गहलोत ने कहा, ह्लउपरोक्त बातों के मद्देनजर मैं भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारर्दिशता (संशोधन) विधेयक, 2025 को राष्ट्रपति के विचार और स्वीकृति के लिए सुरक्षित करता हूं.ह्व कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों ने मार्च में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरोध के बीच इस विधेयक को पारित कर दिया था.

भाजपा का आरोप है कि यह विधेयक अवैध है, क्योंकि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने का कोई प्रावधान नहीं है. पार्टी का यह भी आरोप है कि इस विधेयक से सत्तारूढ. कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति की बू आती है. भाजपा कर्नाटक में जारी अपनी ‘जन आक्रोश यात्रा’ के दौरान इस विधेयक के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है.

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version