राष्ट्रवाणी: भारत सरकार ने आगामी बिजली मांग को देखते हुए 112 से अधिक कैप्टिव कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को 1 अक्टूबर से …और पढ़ें 112 से अधिक कैप्टिव प्लांटों को पूर्ण क्षमता पर चलाने का आदेश। 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक बिजली उत्पादन बढ़ाने का निर्देश। अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंज के माध्यम से बेचने को कहा गया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने बिजली की मांग बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए, 112 से ज्यादा कैप्टिव कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी पूरी क्षमता पर चलाने का आदेश दिया है। यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक लागू रहेगा।
इस आदेश के दायरे में टाटा, रिलायंस, वेदांता, JSW, हिंडाल्को, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों के बिजली संयंत्र भी शामिल हैं। इन संयंत्रों में से कई का इस्तेमाल संबंधित कंपनियां अपने औद्योगिक कामों के लिए करती हैं। सरकार ने यह निर्देश बिजली कानून के Section 11 के तहत दिए हैं।
इस प्रावधान के तहत असाधारण परिस्थितियों में केंद्र या राज्य सरकार किसी बिजली उत्पादन कंपनी को अपने निर्देश के अनुसार बिजली संयंत्र चलाने के लिए कह सकती है। सरकार की इस कवायद के पीछे आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना बताई गई है। सितंबर 2026 में सरकारी आंकड़ों के आधार पर करीब 40 फीसदी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के पास ईंधन का स्टॉक बेहद कम स्तर पर पहुंच गया था।
बढ़ती बिजली खपत और सामान्य से ज्यादा गर्म मौसम को इसकी प्रमुख वजहों में बताया गया है। यानी सरकार अभी से बिजली उत्पादन को मजबूत रखना चाहती है, ताकि मांग बढ़ने पर बिजली की उपलब्धता में परेशानी न आए। सरकार के निर्देश के तहत 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले 112 कैप्टिव पावर प्लांटों को 1 अक्टूबर से साल के अंत तक अधिकतम क्षमता पर बिजली उत्पादन करने को कहा गया है।
इनमें ऐसे संयंत्र शामिल हैं जो मुख्य रूप से बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की बिजली जरूरत पूरी करते हैं। इनमें एल्युमिनियम, स्टील, सीमेंट और तेल रिफाइनरी जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि अगर इन संयंत्रों के पास अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली बचती है, तो उसे पावर एक्सचेंज के जरिए बेचा जाए।
इससे अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इस आदेश के दायरे में कई बड़ी कंपनियों के कैप्टिव पावर प्लांट आते हैं। इनमें **वेदांता, टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, JSW स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल, भारत एल्युमिनियम, हिंदुस्तान जिंक और नायरा एनर्जी** जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इन कंपनियों के लिए कैप्टिव पावर प्लांट इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे उनके अपने कारखानों और औद्योगिक इकाइयों को बिजली मिलती है। सरकार ने केवल उत्पादन बढ़ाने का निर्देश ही नहीं दिया है। इन बिजली संयंत्रों को हर सप्ताह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण यानी CEA को अपनी स्थिति की जानकारी भी देनी होगी।
रिपोर्ट में बिजली उत्पादन, खुद की खपत, बेची गई बिजली, उपलब्ध उत्पादन क्षमता और कोयले के स्टॉक जैसी जानकारी देनी होगी। इससे सरकार को बिजली उत्पादन और ईंधन की स्थिति पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी।

