राष्ट्रवाणी: दुनिया के तीन प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब अल मंदेब और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन …और पढ़ें क्रूड ऑयल सप्लाई को लेकर फिर बढ़ी टेंशन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब अल मंदेब, सऊदी पाइपलाइन बंद। सऊदी अरब का तेल उत्पादन 1990 के बाद सबसे कम।

वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। रूस के अलावा हम खाड़ी देशों से अधिकांश जरूरत का कच्चा तेल आयात करते हैं, लेकिन खाड़ी देशों में चल रही उथल-पुथल ने लगातार सप्लाई को प्रभावित किया है।

फरवरी के बाद से ही ईरान और अमेरिका के युद्ध के कारण तेल सप्लाई का जरूरी समुद्री रास्ता “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” को बंद कर दिया गया था, जिसके बाद से लगातार इस रास्ते से शिपमेंट बाधित हुआ है। अब अन्य रास्तों पर भी अड़चन आ गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनियाभर में तेल सप्लाई के प्रमुख रास्तों में से एक है।

यहां से पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अब दूसरी ओर हूती विद्रोही भी ताबड़तोड़ हमलों के साथ बाब अल मंदेब पर कंट्रोल के कगार पर पहुंच चुके हैं, जो तेल आपूर्ति का एक और जरूरी रास्ता है। इन दोनों रास्ते पर लंबे समय से तनाव का माहौल था।

अब सऊदी अरब ने एक और जरूरी सप्लाई सिस्टम को बंद कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर लगातार ड्रोन हमलों के चलते देश का प्राइमरी बाईपास ऑयल रूट भी बंद हो गया है। इन तीनों जरूरी तेल के रास्तों का बंद होना दुनियाभर के लिए परेशान करने वाली खबर है।

सऊदी दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है। वो समुद्री पाइपलाइन के माध्यम से दुनिया के कई देशों में तेल की सप्लाई करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सउदी अरब की ये मुख्य पाइपलाइन लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी है, जिसके सहारे वे होर्मुज पर निर्भर हुए बिना अरब प्रायद्वीप के पार लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक रोजाना करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल तेल की आपूर्ति करती है।

यह मात्रा ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 4% से 5% है। इसे बंद करने पर तेल का संकट और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 11 सितंबर को ओपेक (OPEC) को ब्रिटेन की ओर से पेश किए गए ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि तेल उत्पादन में महीने-दर-महीने लगभग 19 लाख बैरल प्रति दिन की भारी गिरावट देखी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक ये जुलाई में 81 लाख बैरल प्रति दिन थी, तेल उत्पादन में अचानक आई इस बड़ी गिरावट ने जून में उत्पादन में आई शॉर्ट टर्म बढ़ोतरी को भी खत्म कर दिया है। बता दें कि उस दौरान तेल उत्पादन 71 लाख बैरल प्रति दिन रिकॉर्ड किया गया था। रिपोर्ट से पता चलता है कि सऊदी अरब में तेल उत्पादन 1990 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे ग्लोबल टेंशन बढ़नेके पूरे-पूरे संकेत मिल रहे हैं।

सप्लाई संकट के साथ ही तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है, कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।

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