नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम सामाजिक न्याय की दिशा में उनकी सरकार का एक और ठोस कदम है. उन्होंने कहा कि वक्फ पर पूर्ववर्ती कानून 2013 में भू-माफियाओं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए बनाया गया था. न्यूज18 के ‘राइजिंग भारत शिखर समिट’ को संबोधित करते हुए मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि संसद में इस मुद्दे पर हुई चर्चा में तुष्टीकरण की राजनीति देखने को मिली.

उन्होंने कहा कि 1947 में देश के विभाजन के पीछे भी इसी तरह का रवैया था, जब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ‘कट्टरपंथी’ विचार को बढ़ावा दिया, हालांकि आम मुसलमान इस विचार से सहमत नहीं थे. प्रधानमंत्री ने शाहबानो मामले का संदर्भ देते हुए कहा कि आम मुसलमानों और उनमें से गरीब व पिछड़े लोगों को केवल उपेक्षा, अशिक्षा और बेरोजगारी मिली, जबकि कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की बलि दी गई.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार द्वारा लागू किये गये वक्फ अधिनियम से यह भ्रम पैदा हुआ कि यह कानून संविधान से ऊपर है. उन्होंने केरल में चर्च की संपत्तियों, हरियाणा में गुरुद्वारे की संपत्तियों और कर्नाटक में किसानों की जमीन के अलावा सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड के कथित दावों का हवाला दिया. मोदी ने कहा कि संशोधित अधिनियम समाज और मुस्लिम समुदाय के हित में है.

प्रधानमंत्री ने संसद को इस शानदार कानून को पारित करने के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि संसदीय इतिहास में दूसरी सबसे लंबी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस वर्ष के पहले 100 दिनों में अपनी नीतियों के साथ संभावनाओं के नये द्वार खोले हैं, उन्होंने कहा कि भारत न तो झुकने वाला है और न ही रुकने वाला है. उन्होंने कहा कि तीव्र विकास के लिए शांति, स्थिरता और सुरक्षा बहुत आवश्यक है तथा उनकी सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद पर अंकुश लगाया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने जम्मू कश्मीर में मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता दिखाई है. मोदी ने कहा कि जो लोग सोचते थे कि भारत धीमी गति से चलेगा, वे ”तेज गति से चलने वाला और निडर” भारत देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं की आकांक्षाएं इन 100 दिनों में उनकी सरकार के फैसलों में प्रर्दिशत होती हैं, जिसने भविष्य के लिए एक मजबूत नींव भी रखी है.

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