नयी दिल्ली/धर्मशाला/अमृतसर/तरनतारन/जम्मू. पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर भारत के मिसाइल हमले के बाद धर्मशाला हवाई अड्डा अस्थायी रूप से बंद होने के कारण आईपीएल टीमों की यात्रा का कार्यक्रम प्रभावित हुआ है जिन्हें वहां खेलना है और बीसीसीआई इस अस्थिर स्थिति से निपटने के लिए अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है. धर्मशाला में बृहस्पतिवार को पंजाब किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स का मैच होना है . इसके बाद 11 मई को पंजाब और मुंबई इंडियंस का मैच वहां खेला जाना है. मुंबई टीम का यात्रा कार्यक्रम भी अभी अनिश्चित है .
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए शाम के मैच में ‘फ्लडलाइट्स’ का प्रयोग सुरक्षा मुद्दा है और इसका असर इस बात पर पड़ सकता है कि मैच तय कार्यक्रम के अनुसार होगा या नहीं. हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ”हमें बीसीसीआई या केंद्र और राज्य सरकारों से कल के मैच को रद्द करने के बारे में कोई लिखित सूचना नहीं मिली है. जब तक कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिलता, हम कार्यक्रम के अनुसार ही काम करेंगे. ” रविवार का मुकाबला अभी ‘लॉजिस्टिक’ चुनौती है क्योंकि एयरपोर्ट के अनिश्चितकालीन बंद होने के कारण मुंबई इंडियंस यात्रा करने की स्थिति में नहीं है. पता चला है कि बीसीसीआई मैच को मुंबई में स्थानांतरित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर: अमृतसर और तरनतारन की सीमा से सटे गांव में स्थिति शांत
भारत और पाकिस्तान के मध्य बुधवार को बढ़े तनाव के बीच दोनों सीमावर्ती अमृतसर तथा तरनतारन के गांवों में स्थिति शांत है और लोग रोजमर्रा के अपने काम करते नजर आए. भारतीय सशस्त्र बलों ने पहलगाम आतंकी हमले के दो सप्ताह बाद सख्त जवाबी कार्रवाई करते हुए मंगलवार देर रात पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किये, जिनमें आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के गढ़ भी शामिल हैं.
अधिकारियों ने विद्यालयों और अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बंद करने का आदेश दिया है. हालांकि, दोनों जिलों में लोग शांत हैं. तरनतारन के सीमावर्ती गांव चिन्ना बिधि चंद के निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि गांव में किसी तरह की दहशत नहीं है. स्कूल बंद होने के कारण बच्चे अपने घरों में हैं.
तरनतारन के सीमावर्ती गांव नौशहरा ढल्ला के रहने वाले सुच्चा सिंह ने कहा कि लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हैं और किसान अपने खेतों में काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी सरकारी अधिकारी ने लोगों को उनके घरों को छोड़ने या सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए नहीं कहा है. तरनतारन जिले के सीमावर्ती गांव के एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि किसी ने उन्हें घर छोड़ने के लिए नहीं कहा. ग्रामीण ने कहा, ”गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है.” अमृतसर जिले के अटारी, महावा, पुल मोहरा और भिखविंड के सीमावर्ती गांवों में भी स्थिति शांत नजर आई.
अटारी में एक ग्रामीण ने बताया कि उन्हें दूसरी जगहों से रिश्तेदारों के फोन आ रहे हैं और वे स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि स्थिति शांतिपूर्ण है और वे बिल्कुल भी डरे हुए नहीं हैं. हालांकि, जिन किसानों के खेत कंटीले बाड़ से परे हैं, उन्हें अपने खेतों में जाने की अनुमति नहीं दी गई है, क्योंकि अमृतसर और तरनतारन जिलों की सभी सीमाओं (भारत-पाकिस्तान से जुड़ी सीमा) पर गेट बंद हैं. इस बीच, लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर कतारों में खड़े हुए नजर आए. अमृतसर हवाई अड्डे के निदेशक ने लिखित रूप से बताया कि सभी वाणिज्यिक/नागरिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान परिचालन 10 मई सुबह 5.30 बजे तक निलंबित कर दिये गये हैं.
पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे सीमा के निकट रहने वाले लोग
पाकिस्तान की ओर से हो रही गोलीबारी के मद्देनजर नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास रहने वाले सैकड़ों लोगों को बुधवार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. इससे पहले दिन में पाकिस्तानी सेना ने जम्मू क्षेत्र के पुंछ व राजौरी तथा उत्तरी कश्मीर के बारामूला व कुपवाड़ा के अग्रिम गांवों पर गोलाबारी और मोर्टार से हमला किया जिसमें चार बच्चों और दो महिलाओं समेत 12 लोगों की मौत हो गई तथा 50 से अधिक घायल हो गए.
भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के नौ ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिसके तुरंत बाद सीमापार से गोलीबारी हुई. भारत ने 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए यह हमले किए जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी.
अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित जोरियन गांव के निवासी लियाकत अली ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हालांकि हमारे गांव में सीमा पार से कोई गोलीबारी नहीं हुई है, लेकिन हमें आर एस पुरा में स्थित आईटीआई कॉलेज में स्थानांतरित होने को कहा गया है, जहां मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सरकार ने हमारे रहने के लिए आवश्यक प्रबंध किए हैं.” अली ने कहा कि गांव को अतीत में बहुत नुकसान हुआ है और पाकिस्तानी गोलाबारी के कारण यह गांव तबाह हो गया था.
उन्होंने कहा, “हमें अपनी सुरक्षा के लिए बाहर जाने को कहा गया है और हम सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि गांव की आबादी 1,000 से अधिक है, जिनमें से अधिकांश लोग दूध और दूध से बने उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं.
उन्होंने कहा कि हाल ही में पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा नागरिकों की हत्या के बाद वे भारत और पाकिस्तान के बीच बड़े पैमाने पर युद्ध की आशंका से भयभीत हैं. अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास गगरियां और आसपास के गांवों के निवासियों ने कहा कि उन्हें भी अधिकारियों ने सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा है.
मुंशी राम ने कहा, “हम सीमाओं की सुरक्षा के लिए हमेशा अपने सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं. एक पुलिसकर्मी गांव में आया और लोगों से कहा कि वे फिलहाल सरकारी आवास या किसी रिश्तेदार के घर शरण ले लें.” उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी सुरक्षा एजेंसियों की आंख और कान की तरह हैं, लेकिन मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति सीमा के आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है.
राम ने कहा, “स्थिति सामान्य होने तक फिलहाल किसी अन्य जगह पर रहना सुरक्षित है.” प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा और जम्मू-कश्मीर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रविंदर रैना समेत राजनीतिक नेताओं ने नागरिकों के रिहायशी इलाकों पर पाकिस्तानी गोलाबारी की निंदा की.
कर्रा ने ‘एक्स’ पर कहा, “पाकिस्तान द्वारा पुंछ, मेंढर और उरी सेक्टरों में आम लोगों के क्षेत्रों को निशाना बनाना बेहद निंदनीय है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह प्रभावित परिवारों को सुरक्षित तरीके से निकालने और व्यापक पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करे.” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की सहायता करने का आग्रह किया. रैना ने भी सीमा के करीब रहने वाले निर्दोष लोगों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सीमा पार से होने वाली गोलाबारी से प्रभावित लोगों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित करेगी.
