गलत बिलिंग पर लगेगा विराम
रायपुर, 20 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर केंद्र सरकार की राष्ट्रीय योजना के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाना है, जिससे गलत मीटर रीडिंग और त्रुटिपूर्ण बिलिंग जैसी समस्याओं पर रोक लग सके।
ऊर्जा विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं है, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत देशभर में लागू की गई पहल का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में इस योजना को लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है।
प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू करने का निर्णय वर्ष 2022 में लिया गया था। निविदा प्रक्रिया और कार्यादेश जारी होने के बाद फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हुआ। वर्तमान सरकार पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों और कार्यादेशों के आधार पर ही इस परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है।
ऊर्जा विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से करीब 40 लाख स्मार्ट मीटर अब तक लगाए जा चुके हैं।
उपभोक्ताओं को मिलेंगे कई लाभ
विभाग का दावा है कि स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली खपत का डेटा हर 30 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। साथ ही मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज किए जाने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक बनती है।
स्मार्ट मीटर से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत से जुड़े तकनीकी आंकड़े भी रियल टाइम में प्राप्त होते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति पर लगातार नजर रखने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं
ऊर्जा विभाग ने कहा है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों और तय मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है।
सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी बिजली सेवा का लाभ मिलेगा।
