तमिल सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता Jai ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया और सिनेमा जगत में हलचल मचा दी है। Jai ने बताया कि उन्होंने क्यों इस्लाम धर्म अपनाया और किन अनुभवों ने उन्हें इस फैसले तक पहुंचाया। मंदिरों में मिले अनुभवों से लेकर मस्जिद की शांति तक, उनकी आध्यात्मिक यात्रा ने उन्हें एक नई राह दिखाई। इस खुलासे के बाद धर्म, आस्था और समानता पर नई बहस छिड़ गई है।

Jai कौन हैं? जानिए उनकी कहानी-Jai, जिनका असली नाम जैकांत है, तमिल फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने बिना बड़े फिल्मी परिवार के अपनी अलग पहचान बनाई। चेन्नई में जन्मे Jai संगीतकार Deva के भतीजे हैं और फिल्मों में आने से पहले कीबोर्डिस्ट भी रह चुके हैं। उनकी सादगी और आम लड़के जैसी छवि ने दर्शकों का दिल जीता। उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया और अपनी मेहनत से खुद को स्थापित किया।

Vijay की फिल्म ‘भगवती’ से मिली पहली पहचान-Jai को पहली बार साल 2002 में Thalapathy Vijay की फिल्म ‘भगवती’ में छोटे भाई का किरदार मिला। भले ही रोल छोटा था, लेकिन लोगों ने उन्हें नोटिस किया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा था कि Jai तमिल सिनेमा का जाना-पहचाना नाम बनेंगे।

‘Subramaniapuram’ ने बदली किस्मत-2008 में आई फिल्म ‘Subramaniapuram’ Jai के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। मदुरै के बेरोजगार युवाओं की कहानी ने उन्हें लीड हीरो के तौर पर पहचान दिलाई। इसके बाद ‘चेन्नई 600028’, ‘राजा रानी’ और ‘गोवा’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।

करियर में आई गिरावट, लेकिन धर्म परिवर्तन का कारण नहीं-2010 के बाद Jai के करियर में कुछ गिरावट आई। कई फिल्में उम्मीद के मुताबिक नहीं चलीं, और बड़े सितारों वाली फिल्मों में साइड रोल मिलने लगे। हालांकि Jai ने साफ किया कि उनका धर्म परिवर्तन करियर की असफलता का नतीजा नहीं है। वे आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं और अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।

सबरीमाला से यीशु तक, फिर इस्लाम की ओर-Jai ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में बताया कि उन्होंने कई धर्मों को समझने की कोशिश की। सबरीमाला यात्रा की, व्रत रखा, ईसाई धर्म से प्रभावित होकर यीशु की माला भी पहनी। लेकिन मंदिरों में कुछ अनुभवों ने उन्हें असहज किया। साल 2011 में मस्जिद में मिले अनुभव ने उनकी सोच बदल दी। वहां सबको बराबर समझा गया और सेलिब्रिटी कल्चर नहीं था, जो उन्हें बहुत सुकून देता था।

इस्लाम अपनाने के बाद जीवन में आए बदलाव-Jai ने कहा कि इस्लाम अपनाने के बाद उनकी सोच और स्वभाव में सकारात्मक बदलाव आया। परिवार ने भी उनके फैसले का समर्थन किया। पहले वे किसी भी भगवान की पूजा नहीं करते थे, लेकिन अब कम से कम ईश्वर का नाम लेते हैं। उन्होंने नाम बदलकर “अजीज जय” रखने पर भी विचार किया, हालांकि अभी तक नाम नहीं बदला है।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं-Jai के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे उनकी निजी आस्था का मामला माना और सम्मान दिया, जबकि कुछ ने मंदिरों को लेकर उनके अनुभवों पर सवाल उठाए। कई ने इसे उनके करियर से जोड़कर देखा। Jai ने साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह उनकी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा है।

धर्म, समानता और आस्था पर नई बहस-Jai की कहानी ने धर्म, समानता और आस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सभी धार्मिक स्थल सभी को बराबरी का अनुभव देते हैं? क्या सेलिब्रिटी होने का असर आस्था पर पड़ता है? फिलहाल Jai अपनी फिल्मों और निजी जिंदगी दोनों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं।

 

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