राष्ट्रवाणी: भारतीय सिनेमा में 30,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज से सजाने वाली लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)आखिर ताउम्र कुंवारी क्यों रही? लता मंगेशकर ने क्यों नहीं की ताउम्र शादी? दिग्गज गायिका ने खुद दिया था इसका जवाब अधूरा रह गया था ‘स्वर कोकिला’ का प्यार?

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। ‘भारत की नाइटिंगेल’ (कोकिला) के तौर पर प्यार से याद की जाने वाली लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से अनगिनत लोगों के दिलों को छुआ। अपने शानदार करियर में, उन्होंने 14 अलग-अलग भाषाओं में लगभग 30,000 गाने रिकॉर्ड किए और ‘क्वीन ऑफ मेलोडी’ और ‘वॉइस ऑफ द मिलेनियम’ जैसे खिताब हासिल किए।

संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2001 में भारत रत्न शामिल हैं। प्रोफेशनल लाइफ में हर ऊंचाई को छूने वाली दिग्गज सिंगर आखिर ताउम्र कुंवारी क्यों रही? आइए जानते हैं आखिर उन्होंने ये फैसला क्यों लिया?

लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को बहुत निजी रखा। उन्होंने कभी शादी नहीं की और इसके बजाय खुद को अपने संगीत और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए समर्पित कर दिया। इस फैसले के बारे में बात करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, ‘लोग पूछते हैं कि मैंने कभी शादी क्यों नहीं की।

इस पर मैं कहती हूं कि भगवान ने मुझे एक काम सौंपा था और मैं अपने काम से बहुत संतुष्ट हूं। उन्होंने कहा था, ‘हां, बाकी लोगों की तरह मेरे जीवन में भी दुख के पल आते हैं। लेकिन मेरा दुख बहुत थोड़े समय के लिए होता है।

जो बात मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह है दूसरों को तकलीफ में देखना। ऐसे लोगों की मदद करके मुझे खुशी मिलती है’। बहुत कम लोग जानते हैं कि दिग्गज गायिका को एक बार प्यार हुआ था।

1960 के दशक में, राजस्थान की डूंगरपुर रियासत के शासक महारावल लक्ष्मण सिंहजी के सबसे छोटे बेटे राज सिंह डूंगरपुर (Raj Singh Dungarpur) के साथ उनकी करीबी दोस्ती थी। 1935 में जन्मे राज सिंह क्रिकेट के बहुत शौकीन थे और उन्होंने 1955 से 1971 के बीच रणजी ट्रॉफी में राजस्थान और दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए क्रिकेट खेला।

हालांकि वे 24 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई करने मुंबई आए थे, लेकिन क्रिकेट ही उनका पहला प्यार था। यहीं पर उनकी दोस्ती लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से हुई और वे अक्सर उनके साथ क्रिकेट मैच देखने जाते थे। इन्हीं हालात ने उन्हें लता के करीब ला दिया।

लेकिन जब राज सिंह के पिता को उनके रिश्ते के बारे में पता चला, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। उनके विरोध की वजह यह थी कि लता शाही परिवार से नहीं थीं, अलग समुदाय से थीं और राज से छह साल बड़ी थीं। परिवार के भारी दबाव के कारण, दोनों की शादी कभी नहीं हो पाई।

लता दीदी ने खुद कभी अपने रिश्ते के बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं की। जब उनसे पूछा गया कि क्या राज सिंह ही उनका एकमात्र सच्चा प्यार थे, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में इसका जवाब देते हुए कहा, ‘कुछ बातें सिर्फ दिल ही जानता है। मुझे इसे वैसा ही रहने दें’।

लता जी अक्सर यह मानती थीं कि किस्मत से कोई बच नहीं सकता, लेकिन अच्छे विचारों और अच्छे कामों से इसके असर को कम किया जा सकता है। उन्होंने भगवान राम का उदाहरण देते हुए इसे समझाया, ‘कोई अपनी किस्मत से बच नहीं सकता, लेकिन अच्छे विचार रखकर, दूसरों की मदद करके और अच्छे काम करके, मुझे लगता है कि हम बुरी किस्मत के असर को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा था, ‘राम भगवान विष्णु के अवतार थे। राजा का बेटा होने के बावजूद, उन्हें चौदह साल का वनवास झेलना पड़ा। यह उनकी किस्मत थी।

लेकिन क्योंकि उन्होंने इस दौरान अच्छे काम किए, जिनमें रावण का वध भी शामिल है। इसलिए उन्होंने फिर से अच्छे दिन देखे और ‘रामराज्य’ बनाने में सफल रहे’। आज 28 सितंबर को लता मंगेशकर की बर्थ एनिवर्सरी है।

उनका जन्म 1929 में इंदौर में हुआ था और उन्होंने 6 फरवरी 2022 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। भारतीय सिनेमा की स्वर कोकिला की प्रोफेशनल लाइफ भले ही शिखर पर रही हो लेकन वे निजी जिंदगी में अकेली ही रहीं। फिर चाहे वजह उनका एकलौता प्यार हो या कुछ और, उन्होंने कभी अपने दिल की बात सार्वजनिक नहीं की।

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