राष्ट्रवाणी: यूपी-बिहार की शादियों में बहुत अलग रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं और सबकुछ बड़े ही विधि-विधान से होता है। ऐसा ही एक गाना साल 2013 में रिलीज हुआ था। एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली।

शादी-ब्याह के दौरान आपने कई तरह की रस्म-रिवाजों की बात सुनी होगी। लेकिन क्या कभी ये जानने को मिला कि यहां पर शादी में गाली देने का भी चलन है। यहां सदियों से ऐसी परंपरा चलती आ रही है जिसे स्वागत करना माना जाता है।

बिहार की शादियां सिर्फ रस्मों और रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं हैं। यहां विवाह समारोह में गारी गीत गाया जाता है जोकि खास आकर्षण होते हैं। दुल्हन पक्ष की महिलाएं इन गीतों के जरिए दूल्हे, उसके पिता, चाचा, फूफा और अन्य रिश्तेदारों पर मजाकिया अंदाज में तंज कसती हैं।

वैसे तो ऐसे कई सारे गीत हैं लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘हवा में उड़ता जाए लाल दुपट्टा मलमल’ ( Hawa Mein Udta Jaye Mera Lal Dupatta Malmal Ka) के गाने की। इस विवाह गीत (Vivah Geet) में यूपी बिहार के कल्चर की झलक देखने को मिली। इस फिल्म में मुख्य कलाकार के तौर पर खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) और स्मृति सिन्हा नजर आए थे।

साल 2013 में रिलीज हुई इस फिल्म को अशोक कुमार दीप ने डायरेक्ट किया था। इंदु सोनाली ने इसे अपने स्वर से सजाया था। इस पर कई रील्स भी बनाई गई है।

ये खास अंदाज यूपी-बिहार में काफी अधिक देखने को मिलता है। भले ही पहली नजर में सुनने में ये गीत गाली जैसे लग सकते हैं, लेकिन पारंपरिक रूप में इनके पीछे हास्य, अपनापन और रिश्तों में मधुरता लाने का एक प्रयास है। गारी गीतों में दूल्हे और उसके परिवार को लेकर छेड़छाड़ और व्यंग्य किया जाता है।

महिलाएं सामूहिक रूप से गीत गाती हैं और लड़के वालों की तरफ से आपत्ति नहीं बल्कि मजाक के तौर पर ही लिया जाता है। गारी गीतों की शुरुआत को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। कई जगह इसे राम-सीता विवाह से जोड़कर देखा जाता है।

कहा जाता है कि जब राम विवाह के लिए मिथिला पहुंचे, तब वहां की महिलाओं ने वर पक्ष के लोगों का स्वागत तंज और हास्य से भरे गीतों के जरिए किया था।

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