जोधपुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि दिव्यांग समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसके तहत यह सुनिश्चित करना समाज की जिम्मेदारी बने कि दिव्यांग राष्ट्र निर्माण में योगदान दें और जीवन में आगे बढ़ें.

शाह यहां पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय की तीन परियोजनाओं की आधारशिला रखने आए थे. इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और राज्य के मंत्री भी मौजूद थे.
दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बनाने में संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए शाह ने बताया कि किस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के योगदान से छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव लाते हैं.

शाह ने कहा, “इस तरह, एक दिन हम निश्चित रूप से उनके (दिव्यांगों) लिए एक अच्छा जीवन और करियर सुनिश्चित कर पाएंगे.” गृह मंत्री ने दिव्यांग समुदाय से जुड़े मुद्दों के समाधान और उनके प्रति नजरिया बदलने के लिए सरकार के प्रयासों का भी जिक्र किया.
साल 2015 में “विकलांग” शब्द की जगह “दिव्यांग” शब्द इस्तेमाल किया गया, जिसका अर्थ है दिव्य शरीर. शाह ने कहा, “शब्द के इस एक परिवर्तन ने लोगों और सरकारों के दृष्टिकोण को बदल दिया.” उन्होंने कहा, “हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसके तहत यह सुनिश्चित करना समाज की जिम्मेदारी हो कि दिव्यांग राष्ट्र निर्माण में योगदान दें और जीवन में आगे बढ़ें.”

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