राष्ट्रवाणी: अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके 10 फिल्मी डायलॉग्स हमेशा-हमेशा के लिए अमर रहेंगे। नाना पाटेकर के डायलॉग्स (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट) एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) की निधन की खबर ने सभी को हैरान कर दिया है।

75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट की वजह से नाना ने आखिरी सांस ली है। इस बीच हम आपको नाना पाटेकर के उन 10 दमदार डायलॉग्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सिनेमा जगत के इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए अमर रहेंगे। आइए जानते हैं कि वह कौन सी फिल्में थी, जिनमें नाना के संवाद सुनकर थिएटर्स में लोगों ने जमकर सीटियां बजाई थीं।

बतौर अभिनेता नाना पाटकेर साल 1978 में आई फिल्म गमन से अपने एक्टिंग करियर का आगाज किया था। इसके बाद वह क्रांतिवीर, यशवंत और तिरंगा जैसी कई बेहतरीन फिल्मों का हिस्सा रहे और उनकी मूवीज के डायलॉग्स भी काफी ज्यादा पॉपुलर रहे थे, जिनकी लिस्ट इस प्रकार है- आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने…क्रांतिवीर ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा… क्रांतिवीर एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है… यशवंत सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान… यशवंत हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं…क्रांतिवीर धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं… परिंदा हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है… अब तक छप्पन एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है… प्रहार साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे… वेलकम बात की जाए नाना पाटेकर के एक्टिंग करियर के सबसे ज्यादा लोकप्रिय डायलॉग के बारे में तो वह साल 1994 में आई फिल्म क्रांतिवीर का आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने… वाला संवाद सबसे अधिक पॉपुलर रहा था, जिसे आज भी याद किया जाता है।

गौर करने वाली बात ये है कि नाना पाटेकर के संवाद का स्टाइल काफी अलग और यूनिक था। वह फिल्मों में कुछ इस तरह से डायलॉग बोलते थे, जैसे कि असल जिंदगी में किसी से वास्तविक तौर पर बात कर रहे हैं। उनका ये अंदाज उनकी डायलॉग डिलीवरी को खास बनाता था।

इसी वजह से शायद नाना पाटेकर को हिंदी सिनेमा के महान अभिनेताओं की फेहरिस्त में शामिल किया जाएगा।

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