राष्ट्रवाणी: कोरोना महामारी से उबरने के बाद भी लाखों लोग लंबे समय तक इसके लक्षणों से जूझते रहे हैं, जिसे मेडिकल साइंस में लॉन्ग कोविड कहा जाता है. अब इस बीमारी को लेकर एक नया और बेहद चौंकाने वाला वैज्ञानिक खुलासा हुआ है. हालिया रिसर्च के मुताबिक, लॉन्ग कोविड से पीड़ित मरीजों के मुंह और फेफड़ों में रहने वाले बैक्टीरिया के मिश्रण में सामान्य लोगों के मुकाबले काफी बड़ा और स्पष्ट अंतर देखा गया है. यूरोपीय रेस्पिरेटरी जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया है कि फेफड़ों के बैक्टीरिया में आने वाला यही बदलाव मरीजों में सांस की तकलीफों के साथ-साथ उनके दिमाग और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं का मुख्य कारण हो सकता है. इस स्टडी की लेखिका और यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ डंडी की शोधकर्ता डैनियला अल्फ्रेस डी लामा हेडली के अनुसार, इससे पहले की रिसर्च में लॉन्ग कोविड और पेट के बैक्टीरिया के संबंधों पर ध्यान दिया गया था. लेकिन चूंकि कोविड मुख्य रूप से फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, इसलिए वैज्ञानिकों ने इस बार सीधे फेफड़ों के बैक्टीरिया की जांच करने का फैसला किया. दुनिया भर में लाखों लोग आज भी लॉन्ग कोविड के अज्ञात कारणों से प्रभावित हैं. चूंकि माइक्रोबायोम हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि फेफड़ों के बैक्टीरिया में गड़बड़ी ही लॉन्ग कोविड की मुख्य वजह हो सकती है. वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च को पुख्ता करने के लिए यूके के 38 अलग-अलग अस्पतालों में फरवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच कोविड का इलाज करा चुके 771 मरीजों के स्वास्थ्य का बारीकी से अध्ययन किया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के 5 महीने बाद मरीजों के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर उन्हें 4 अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा गया. इनमें बहुत ज्यादा गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों से लेकर बेहद हल्के लक्षणों वाले मरीज शामिल थे. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने बाद वैज्ञानिकों ने इन सभी मरीजों के मुंह से लार और फेफड़ों से बलगम के सैंपल लिए और DNA सीक्वेंसिंग तकनीक के जरीए उनमें मौजूद सूक्ष्म जीवों और बैक्टीरिया की पहचान की. सेंपल्स की जांच के बाद जो नतीजे सामने आए उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. जिन मरीजों में लॉन्ग कोविड के लक्षण सबसे ज्यादा गंभीर थे, उनके मुंह और फेफड़ों के माइक्रोबायोम में भारी बदलाव देखा गया. रिसर्च में सामने आया कि इन बैक्टीरिया में बदलाव के कारण मरीजों के फेफड़ों की काम करने की क्षमता कम हो गई, जिससे फेफड़े सामान्य रूप से हवा को अंदर-बाहर पंप नहीं कर पा रहे थे. इसके अलावा, जिन मरीजों के श्वसन मार्ग के बैक्टीरिया में असंतुलन था, उनमें ब्रेन फॉग (याददाश्त कमजोर होना, ध्यान लगाने में दिक्कत) जैसी मानसिक समस्याएं और पेट में दर्द, उल्टी, दस्त व भूख न लगने जैसी पाचन तंत्र की परेशानियां सबसे ज्यादा देखी गईं. स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और रेस्पिरेटरी रिसर्च के चेयरमैन प्रोफेसर जेम्स चामर्स ने बताया कि गंभीर लॉन्ग कोविड के मरीजों में लैक्टिक एसिड पैदा करने वाले बैक्टीरिया की संख्या जरूरत से बहुत ज्यादा बढ़ गई थी. यह अधिकता सीधे तौर पर मरीजों के खून में पाई जाने वाली अंदरूनी सूजन से जुड़ी हुई थी. प्रोफेसर चामर्स के मुताबिक, एयरवे माइक्रोबायोम में आने वाली यह खराबी केवल फेफड़ों की बीमारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह मरीज के पूरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को व्यापक रूप से प्रभावित करती है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस नई खोज से भविष्य में लॉन्ग कोविड के सटीक कारणों को समझने और इसके इलाज के लिए नई दवाइयां व थेरेपी विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
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