राष्ट्रवाणी: पीलीभीत की खोया मिठाई अपनी शुद्धता और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर है। यूपी के पीलीभीत की मशहूर खोया मिठाई की खासियत (Image Source: एआई-Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
उत्तर प्रदेश का पीलीभीत शहर सिर्फ अपने टाइगर रिजर्व के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां के स्वाद भी दूर-दूर तक मशहूर हैं। जी हां, खासकर यहां की शुद्ध मावे से बनने वाली मिठाई, जिसका नाम सुनते ही मीठा खाने वालों के मुंह में पानी आ जाता है। आखिर ऐसा क्या है इस मिठाई में जो इसे बाकी जगहों से अलग और खास बनाता है?
आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं। पीलीभीत की खोया मिठाई – परंपरा, शुद्धता और मिठास का अनूठा स्वाद पीलीभीत की प्रसिद्ध खोया मिठाई अपनी शुद्धता, मुलायम बनावट और समृद्ध स्वाद के लिए विशेष पहचान रखती है। ताज़े दूध से तैयार किए गए शुद्ध खोये को धीमी आँच पर पकाया जाता है।
@Dmpilibhit @cdopbt1 पीलीभीत एक तराई इलाका है, जहां प्राकृतिक हरियाली की कोई कमी नहीं है। यहां के पशुओं को खाने के लिए भरपूर हरा चारा मिलता है, जिससे गाय-भैंसों का दूध बहुत गाढ़ा और प्राकृतिक रूप से मीठा होता है। जब इस ताजे और बेहतरीन क्वालिटी के दूध से खोया तैयार किया जाता है, तो उसमें किसी मिलावट की गुंजाइश ही नहीं बचती।
आजकल कई जगह मिठाइयां मशीनों से बनती हैं, लेकिन पीलीभीत के पुराने और मशहूर हलवाई आज भी अपना पारंपरिक तरीका ही अपनाते हैं। बड़ी-बड़ी लोहे की कड़ाहियों में दूध को धीमी आंच पर घंटों तक उबाला और मथा जाता है। इस धीमी आंच की वजह से मावे में एक बेहतरीन सोंधापन और हल्का-सा भूरा रंग आ जाता है।
यही मेहनत मिठाई को एक दानेदार और मखमली टेक्सचर देती है। पीलीभीत की इस खोया मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें चीनी की चाशनी का भारीपन नहीं होता। जब आप इसका एक टुकड़ा खाते हैं, तो यह सीधा मुंह में मक्खन की तरह घुल जाता है।
इसमें दूध की अपनी प्राकृतिक मिठास हावी रहती है, जो इसे बहुत ज्यादा मीठा और भारी होने से बचाती है। त्योहारों के मौसम में जहां हर तरफ मिलावटी मावे का डर बना रहता है, वहीं पीलीभीत का यह शुद्ध खोया अपनी प्रामाणिकता के लिए जाना जाता है। इसे खाने पर आपको पता चल जाता है कि आप असली और देसी स्वाद का आनंद ले रहे हैं।
